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उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 35वीं बैठक

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 35वीं बैठक

ल्द्वानी , 29 मई (हि.स.)। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 35वीं बैठक विश्वविद्यालय के कुलपति एवं विद्या परिषद के अध्यक्ष प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।

बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, शोध एवं प्रशासनिक कार्यों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया तथा परिषद ने विभिन्न प्रस्तावों को अपनी संस्तुति प्रदान की।

बैठक में विद्या परिषद की 34वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि एवं अनुमोदन के साथ ही पूर्व बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्यवाही की समीक्षा की गई। परिषद ने शैक्षणिक सत्र जुलाई 2026 से समस्त सेमेस्टर आधारित कार्यक्रमों के वार्षिक शुल्क को सेमेस्टरवार लिए जाने तथा एमबीए एवं एमसीए कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्राप्त करने का विकल्प उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की। इस निर्णय से विद्यार्थियों को पूरे वर्ष का शुल्क एकमुश्त जमा नहीं करना पड़ेगा तथा उनका आर्थिक बोझ कम होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप विद्यार्थियों को प्रदान किए जाने वाले ट्रांसक्रिप्ट के नवीन प्रारूप को भी परिषद ने अनुमोदन हेतु संस्तुत किया। बैठक में विश्वविद्यालय के पांच नवीन एमओओसी पाठ्यक्रमों को स्वयं पोर्टल पर स्वीकृति प्राप्त होने की जानकारी परिषद के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिस पर सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की।

परिषद ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर को भी अपनी संस्तुति प्रदान की। इसके अतिरिक्त वाणिज्य विभाग के शोधार्थी किरण कुमार एवं इतिहास विभाग के शोधार्थी प्रवीन लखेड़ा की पीएचडी मौखिकी परीक्षा आख्या का अनुमोदन किया गया।

विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने हेतु आवेदन प्राप्त करने की तिथि निर्धारित करने तथा पीएचडी मौखिकी परीक्षा आख्या पर आंतरिक परीक्षक एवं संबंधित निदेशक के हस्ताक्षर लिए जाने संबंधी प्रस्तावों पर भी परिषद ने विचार कर अपनी संस्तुतियां प्रदान कीं।

बैठक का महत्वपूर्ण विषय विश्वविद्यालय की परिनियमावली में संशोधन कर 'भाषा विद्याशाखा' (स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज) को शामिल किए जाने संबंधी प्रस्ताव रहा। इस विषय पर विस्तृत चर्चा के उपरांत परिषद ने भाषा विद्याशाखा सहित अन्य विद्याशाखाओं के पुनर्गठन के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया। समिति अपनी आख्या आगामी विद्या परिषद की बैठक में प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय की विभिन्न विद्याशाखाओं के अंतर्गत सम्पन्न अध्ययन बोर्डों (बोर्ड ऑफ स्टडीज़) की संस्तुतियों को भी परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। अध्यक्ष की अनुमति से प्रस्तुत अतिरिक्त प्रस्तावों में जुलाई 2026 सत्र से एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर में 'माइक्रो फाइनेंस' नामक नवीन ऐच्छिक पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए जाने तथा विश्वविद्यालय शोध उपाधि अध्यादेश-2026 के अंतर्गत पीएचडी कार्यक्रम की रिक्त सीटों को प्रवेश परीक्षा के माध्यम से भरे जाने संबंधी प्रस्तावों पर भी परिषद ने विचार कर अपनी संस्तुति प्रदान की।

बैठक ऑनलाइन व ऑफलाइन (हाइब्रिड मोड) में आयोजित की गई। बाह्य सदस्यों के रूप में प्रो. एनसी. पोखरियाल, पूर्व कार्यकारी निदेशक, मुक्त शिक्षा विद्याशाखा, दिल्ली विश्वविद्यालय; प्रो. पीएस. बिष्ट, विभागाध्यक्ष, भौतिक विज्ञान विभाग एवं परिसर निदेशक, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा, डॉ. एच.सी. पुरोहित, प्रोफेसर एवं डीन, प्रबन्ध अध्ययन विद्याशाखा, दून विश्वविद्यालय, देहरादून; तथा डॉ. मनु प्रताप सिंह, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कम्प्यूटर साइंस विभाग, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की।

बैठक में विश्वविद्यालय के आंतरिक सदस्यों के रूप में कुलसचिव खेमराज भट्ट, वित्त अधिकारी श्री सूर्य प्रताप सिंह, विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक, प्रोफेसर एवं परिषद के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता

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