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बेहमई सामूहिक नरसंहार : नहीं मिली मूल केस डायरी, 24 तक टला फैसला

- अदालत ने पुलिस को लगाई फटकार और लिपिक को भी जारी किया नोटिस
- 23 आरोपितों में से फूलन देवी समेत 16 लोगों की हो चुकी है मौत
- पीड़ित पक्ष फैसला नहीं आने से निराश, पूछा- कब आएगा निर्णय

मोहित वर्मा
कानपुर देहात, 18 जनवरी (हि.स.)। देश के बहुचर्चित बेहमई सामूहिक नरसंहार मामले का फैसला शनिवार को एक बार फिर टल गया। दस्यु प्रभावित विशेष न्यायाधीश ने पुलिस द्वारा कोर्ट में मूल केस डायरी नहीं उपलब्ध कराई गई, जिससे इस मामले का फैसला 24 जनवरी तक टाल दिया गया। अदालत ने इसके लिए पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है और सत्र न्यायालय के लिपिक को नोटिस भी जारी किया है।

उत्तर प्रदेश में 80 के दशक में तत्कालीन दस्यु सुन्दरी फूलन देवी का कानपुर मंडल के जिलों व आसपास चम्बल से सटे बीहड़ों में आतंक था। फूलन देवी ने गिरोह के 35-36 डकैतों के साथ कानपुर देहात के राजपुर थानाक्षेत्र अंतर्गत बेहमई गांव में करीब 39 साल पूर्व 14 फरवरी 1981 को धावा बोल दिया था। कई घंटे तक गैंग के सदस्यों ने गांव में तांडव मचाते हुए क्षत्रिय समाज के 20 लोगों की हत्या कर दी थी। इसी मामले का फैसला शनिवार को सुनाया जाना था, लेकिन एक बार फिर निर्णय साक्ष्यों के अभाव में टल गया।
उल्लेखनीय है कि पूरे मामले पर डेढ़ माह से चल रही बहस अदालत में पूरी हो चुकी है। शनिवार को अदालत को फैसला सुनाना था, लेकिन मूल केस डायरी उपलब्ध न होने पर 24 जनवरी तक के लिए एक बार फिर फैसला टाल दिया। न्यायालय ने इस दौरान सरकारी अधिवक्ता राजू पोरवाल और डकैतों के वकील गिरीश चन्द्र दुबे को कोर्ट से बाहर कर दिया। साथ ही पुलिस को जल्द मूल केस डायरी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। इससे पूर्व भी छह जनवरी को बेहमई नरसंहार में कोर्ट की तारीख थी। उस समय भी कोर्ट ने साक्ष्य संकलन पूरे न होने पर 16 जनवरी तक का समय दिया था और फैसला सुनाए जाने की तारीख 18 जनवरी तय की थी।
केस की कहानी सरकारी वकील की जुबानी
सरकारी वकील राजू पोरवाल ने बताया कि 2011 में जब ट्रायल शुरू हुआ था तब पांच आरोपित थे, जिसमें से एक आरोपित की जेल में ही मौत हो गयी थी और जिस दिन घटना हुई थी, उस दिन दर्ज एफआईआर में पुलिस ने चार गैंग फूलनदेवी, राम औतार, मुस्तकीम और लल्लू गैंग और 35-36 डकैतों को आरोपित बनाया था। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद कभी सारे आरोपित एकसाथ अदालत में हाजिर नहीं हो पाए। इस वजह से ट्रायल नहीं शुरू हो पाया।

उन्होंने बताया कि अब चार आरोपित बचे हैं, जिसमें तीन आरोपित भीखा, श्यामबाबू और विश्वनाथ जमानत पर हैं। जबकि पोसा जेल में है और फैसला आने वाला है। अगली तारीख 24 जनवरी अदालत ने दी है। संभावना है कि उस रोज कोर्ट निर्णय सुना दे।
बचाव पक्ष के वकील का कहना है :
डकैतों के वकील गिरीश चन्द्र दुबे रघुनंदन सिंह ने बताया कि प्ररकण में जो मुख्य आरोपित थे, उनकी मौत हो चुकी है और कुछ हाजिर भी नहीं हुए। जो चार लोग बचे हैं, ये दोषी नहीं हैं, क्योंकि जो विश्वनाथ है वो घटना के वक्त नाबालिग था और जो लोग हैं वो मुख्य आरोपित नहीं थे। बाकी न्यायालय जो भी फैसला देगा, वह मान्य होगा।
23 आरोपितों पर चला मुकदमा :
हत्याकांड के वादी राजाराम सिंह, जंटर सिंह, राजू सिंह और देवदत्त ने बताया कि अलग-अलग समय में कोर्ट में कुल 23 आरोपितों पर केस चला। मुख्य आरोपित फूलन देवी सहित 16 आरोपितों की मौत हो चुकी है। 23 आरोपितों में जालौन जनपद के रहने वाले आरोपित मान सिंह, रामकेश, विश्वनाथ उर्फ अशोक फरार चल रहे हैं। सिर्फ एक आरोपित पोसा ही जेल में है। राजाराम का कहना है कि हमें उम्मीद थी कि कोर्ट आरोपितों को जरूर सजा देगा, लेकिन केस डायरी न मिलने की बात कहकर सुनवाई फिर 24 जनवरी तक के लिए टाल दी गई।
जो निर्णय आएगा वह मान्य होगा :
बेहमई कांड का जेल में बंद जालौन निवासी आरोपित पोसा ने शनिवार को कोर्ट से निकलने के बाद मीडिया से बातचीत की। उसने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि मुझे पुलिस ने पकड़कर घटना में फंसाया है। इस मामले में न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, उसे स्वीकार होगा।
मल्लाह परिवार में हुआ था फूलन का जन्म :
10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन के घूरा का पुरवा गांव में फूलन देवी का जन्म एक मल्लाह परिवार में हुआ था। फूलन का बचपन बेहद गरीबी में बीता, लेकिन वह बचपन से ही दबंग थी। दस साल की उम्र में जब उसे पता चला कि चाचा ने उसकी जमीन हड़प ली है तो चचेरे भाई के सिर पर ईंट मार दी थी। फूलन के घरवाले उसकी इस हरकत से इतना नाराज हो गए थे कि महज 10 साल की उम्र में 25 साल बड़े आदमी से शादी कर दी थी। शादी के बाद उसके पति ने रेप किया।

धीरे-धीरे फूलन की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उसे मायके आना पड़ा। इसके बाद फूलन डाकू बन गयी और बाद में बेहमई नरसंहार किया। इसी घटना से वह चर्चा में आयी और समर्पण के बाद उत्तर प्रदेश की मीरजापुर सीट से सपा से सांसद बनी।
दिल्ली में फूलन देवी की हुई थी हत्या :
बेहमई कांड के बाद फूलन देवी ने मध्य प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। मीरजापुर से लोकसभा की सांसद चुने जाने के पहले वह काफी दिनों तक ग्वालियर और जबलपुर जेल में रही। वर्ष 2001 में शेर सिंह राणा ने दिल्ली में फूलन देवी की उसके घर के बाहर हत्या कर दी थी।
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