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अवैध हिरासत में रखने के लिए व्यक्ति को पांच लाख रुपये मुआवजा दे सरकार: अदालत

अवैध हिरासत में रखने के लिए व्यक्ति को पांच लाख रुपये मुआवजा दे सरकार: अदालत

IBC24 4 months ago

प्रयागराज, एक जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी पर रोक संबंधी अंतरिम आदेश के बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एक व्यक्ति को अवैध हिरासत में रखने के लिए राज्य सरकार को पीड़ित को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया।

अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी द्वारा आधिकारिक कर्तव्य के उचित निर्वहन में लापरवाही, उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का उल्लंघन और अनुशासनहीनता के लिए उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का भी निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ अनिल सोनी नाम के व्यक्ति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, एक महिला ने उसके खिलाफ सिद्धार्थ नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 (छलपूर्ण साधनों का प्रयोग कर यौन संबंध बनाना) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

व्यक्ति का उस महिला से पिछले दो वर्षों से प्रेम प्रसंग था।

याचिकाकर्ता ने एक अप्रैल को प्राथमिकी को चुनौती दी थी, जिस पर एक अन्य खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

यह आदेश उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर छह अप्रैल को अपलोड किया गया था और उसे चार अप्रैल को ही संबंधित थाना प्रभारी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था।

याचिकाकर्ता ने मौजूदा याचिका में दलील दी कि उसके भाई ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बारे में थाना प्रभारी को सूचित करने के लिए चार अप्रैल को एक हलफनामा दिया था।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यहां तक कि उनके वकील ने थाना प्रभारी से संपर्क किया था लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

उच्च न्यायालय के समक्ष अपर शासकीय अधिवक्ता ने यह दलील देते हुए गिरफ्तारी को उचित ठहराया कि गिरफ्तारी पर रोक के अंतरिम आदेश को प्रस्तुत नहीं किए जाने की वजह से थाना प्रभारी गिरफ्तारी करने के लिए बाध्य था।

पीठ ने हालांकि यह दलील इस आधार पर खारिज कर दी कि अंतरिम आदेश राज्य सरकार के वकील और शिकायतकर्ता के वकील की मौजूदगी में पारित किया गया इसलिए, सभी प्रतिवादी, उस आदेश से पूरी तरह वाकिफ थे।

अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 13 जुलाई निर्धारित करते हुए जिले के पुलिस अधीक्षक को याचिकाकर्ता को मुआवजे के भुगतान के संबंध में एक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने और थाना प्रभारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की सूचना देने का निर्देश दिया।

भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र

जितेंद्र

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