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CG Jaggi Murder Case: "अमित जोगी के लिए फांसी की मांग करेंगे".. जानें किसने कह दी ये बड़ी बात?.. आजीवन कारावास के फैसले पर भी दी ये प्रतिक्रिया

CG Jaggi Murder Case: "अमित जोगी के लिए फांसी की मांग करेंगे".. जानें किसने कह दी ये बड़ी बात?.. आजीवन कारावास के फैसले पर भी दी ये प्रतिक्रिया

IBC24 1 week ago

बिलासपुर: जग्गी हत्याकांड पर बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला आया है। कोर्ट ने निचले अदालत के फैसले को पलटते हुए इस मामले में अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। (Chhattisgarh Jaggi Murder Case) कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रदेश की सियासत में फिर से गर्माहट महसूस की जा रही है।

रामावतार जग्गी के बेटे ने दिए प्रतिक्रिया

हाईकोर्ट के फैसले पर दिवंगत नेता रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। सतीश ने कह है कि, वो कोर्ट से अमित जोगी को फांसी देने की गुजारिश करेंगे साथ ही पासपोर्ट जप्त करने का भी अनुरोध करेंगे। सतीश जग्गी ने कहा कि सुनवाई के दौरान मुझे कई बार धमकाया चमकाया गया , मेरी बहन की शादी में अड़चन पैदा करने की कोशिश की गई। आज के फैसले पर सतीश जग्गी ने कहा कि, हमारे पूरे परिवार को न्यायपालिका पर भरोसा था न्यायपालिका की जीत हुई।

दिया था आत्मसमर्पण करने का आदेश

गौरतलब है कि, जग्गी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने आदेश की कॉपी पोर्टल पर अपलोड कर दी है। (Chhattisgarh Jaggi Murder Case) इससे पहले मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को 2003 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता रामावतार जग्गी की हत्या के मामले (Jaggi Murder Case) में दोषी ठहराया और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।

कौन थे रामवतार जग्गी?

छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद प्रदेश की सियासत दो दलों के बीच घूमने लगी थी। इनमें पहला था अजीत जोगी की अगुवाई वाली कांग्रेस जबकि दूसरी एनसीपी यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी। राकांपा के मुखिया थे केंद्र में मंत्री रह चुके विद्याचरण शुक्ल। रामवतार जग्गी विद्याचरण शुक्ल के बेहद खास थे। सियासी संबंधों के साथ ही शुक्ल और जग्गी के बीच पारिवारिक रिश्ता भी था।

यह रामवतार जग्गी का अपने नेता विद्याचरण शुक्ल के प्रति समर्पण ही था कि, शुक्ल के कांग्रेस छोड़ने और नई पार्टी बनाने के दौरान जग्गी उनके साथ रहें। इन्ही वजहों से विद्याचरण शुक्ल ने रामावतार जग्गी को पार्टी का कोषाध्यक्ष भी नियुक्त कर दिया था। (Chhattisgarh Jaggi Murder Case) अपनी राजनीतिक सक्रियता और प्रभाव के चलते वे क्षेत्र में एक अहम चेहरा बन गए थे। संभवतः इन्ही वजहों से उनके खिलाफ राजनीतिक कटुता बढ़ती गई और उन्हें अपनी सक्रियता की कीमत जान गंवाकर चुकानी पड़ी। चार जून, 2003 को मौदहापारा इलाके में रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

डॉ रमन सिंह ने CBI को सौंपा था जाँच का जिम्मा

बता दें कि राकांपा नेता रामावतार जग्गी की हत्या चार जून, 2003 को हुई थी, जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। इस मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी। राज्य में 2003 में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद रमन सिंह की सरकार ने इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने अमित जोगी समेत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।

रायपुर की एक अदालत ने 31 मई, 2007 को फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। हालांकि, अदालत ने अमित जोगी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था। (Chhattisgarh Jaggi Murder Case) सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने देरी के आधार पर 2011 में जांच एजेंसी की याचिका खारिज कर दी थी। छत्तीसगढ़ सरकार तथा मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग याचिका भी खारिज कर दी गई थी। पिछले साल नवंबर में उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से कहा था कि वह सीबीआई की उस याचिका पर फिर से विचार करे जिसमें जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगी गई थी।

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