Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
जर्सी विवाद को श्रीजेश ने किया खारिज, टीम से कहा, फोकस 50 साल बाद पदक जीतने पर है

जर्सी विवाद को श्रीजेश ने किया खारिज, टीम से कहा, फोकस 50 साल बाद पदक जीतने पर है

IBC24 2 weeks ago

(मोना पार्थसारथी)

यी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) महान गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग केसरिया किये जाने को लेकर विवाद को खारिज करते हुए टीम से बाहर की आवाजों पर ध्यान नहीं देते हुए पूरी ऊर्जा 50 साल बाद विश्व कप में पदक जीतने पर फोकस करने के लिये कहा है ।

तोक्यो ओलंपिक 2020 में 41 साल बाद भारतीय हॉकी टीम के ओलंपिक कांस्य जीतने और 2024 में पेरिस में उस प्रदर्शन को दोहराने में अहम भूमिका निभाने वाले इस दिग्गज ने जर्सी विवाद के बारे में पूछे जाने पर भाषा से कहा ,'' सच कहूं तो मुझे पहले समझ ही नहीं आया कि क्या मसला है क्योंकि 2014 और 2018 विश्व कप में भी जर्सी का रंग बदला था । हमारी एक ट्रेनिंग किट का भी रंग आरेंज है । इस बार विश्व कप से पहले इतनी चर्चा क्यों हो रही है । केसरिया रंग की वजह से या जर्सी का रंग बदलने की वजह से ।''

नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग बदलकर नीले से केसरिया कर दिया गया है । इस पर पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा , धनराज पिल्लै, अजित पाल सिंह, वासुदेवन भास्करन और परगट सिंह समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाये थे ।

पेरिस ओलंपिक के बाद हॉकी से विदा लेकर कोच बने श्रीजेश ने कहा ,''अगर विवाद रंग बदलने की वजह से है तो 2014 और 2018 में भी होना चाहिये था जब हमने पीली और हल्के नीले रंग की जर्सी पहनी थी ।''

उन्होंने कहा कि जर्सी का रंग बदलने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यह कहना कि नीली टर्फ पर खेलने में दिक्कत होती है, समझ से परे है क्योंकि इतने साल से नीली जर्सी में ही तो खेलते आये हैं ।

भारत के लिये 339 मैच खेल चुके और पिछले साल चेन्नई में जूनियर हॉकी विश्व कप में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के कोच रहे 38 वर्ष के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा ,''मुझे जर्सी के रंग बदलने से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उसका जो कारण बताया जा रहा है , वह समझ से परे है । अगर खेलने में दिक्कत की वजह से रंग बदला जा रहा है तो फिर दोबारा नीली जर्सी कभी नहीं पहननी चाहिये ।''

उन्होंने कहा ,'' यह सही है कि एक सा रंग होने से देखने में थोड़ा मुश्किल तो होता है लेकिन 2012 लंदन ओलंपिक में नीली टर्फ आने के बाद से अब तक 14 साल में दो ही बार जर्सी का रंग बदला है । बाकी टूर्नामेंट में हम नीली जर्सी में ही खेले हैं जिसमें पेरिस ओलंपिक, तोक्यो ओलंपिक शामिल है ।''

उन्होंने यह भी कहा कि अगर खिलाड़ियों की मर्जी से यह फैसला किया गया है तो विवाद होना ही नहीं चाहिये था ।

उन्होंने कहा ,'' मीडिया में मैने जो कुछ भी देखा है, उसमें यही बोला गया है कि खिलाड़ियों की सहमति से रंग बदला गया है । हॉकी इंडिया ने एफआईएच से केसरिया रंग की जर्सी के लिये अनुमति ली होगी । अब चूंकि आरेंज हालैंड की जर्सी का भी रंग है तो जब उससे मैच होगा तो हम अपनी दूसरी सफेद जर्सी पहनकर खेल सकते हैं ।''

उन्होंने कहा ,''अगर इस फैसले में खिलाड़ियों की मंजूरी है तो बात वही खत्म हो जाती है क्योंकि आखिर में तो मैदान पर खिलाड़ियों को ही खेलना होता है ।''

मसले के राजनीतिक रंग लेने के बारे में उन्होंने कहा ,'' मेरा मानना है कि राजनीति को खेलों से दूर रखना चाहिये । खिलाड़ी सबसे अहम है और अगर उन्हें दिक्कत नहीं है तो बाहर बैठे लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिये। ''

श्रीजेश ने हालांकि यह जरूर कहा कि अगर रंग बदला जाना था तो यह पहले हो जाना चाहिये था कि खिलाड़ियों को नयी जर्सी की आदत हो सके ।

उन्होंने कहा ,'' मुझे लगता है कि खिलाड़ियों को इस जर्सी को पहनकर थोड़ा खेलने का भी मौका देना चाहिये था । अभी तक हमें नीली जर्सी में खेलने की आदत है । मान लीजिये कि मैं मैदान में खेल रहा हूं और सामने हरमनप्रीत है तो मैं उसे नीली जर्सी में ही तलाशूंगा ।अगर जर्सी का रंग बदलना था तो थोड़ा जल्दी करना चाहिये था ।''

श्रीजेश ने यह भी कहा कि उन्हें यकीन है कि विश्व कप से पहले मैदान से बाहर की आवाजों का टीम पर कोई असर नहीं होगा ।

उन्होंने कहा,'' हम टीम के भीतर हमेशा बोलते थे कि बाहर की आवाजों से दूर रहना है । मैदान से बाहर की बातों का पता तो रहता है लेकिन शुक्र है कि अभी उनके पास समय है । अब टीम यूरोप में है और इन बातों को भुलाकर अब पूरा फोकस टूर्नामेंट पर करना होगा ।''

श्रीजेश ने कहा कि भारत के पास विश्व कप में 50 साल का पदक का इंतजार खत्म करने का यह सबसे सुनहरा मौका है और खिलाड़ियों को इसे चूकना नहीं चाहिये ।

यह पूछने पर कि टीम को क्या संदेश देना चाहेंगे, उन्होंने कहा ,'' मैं इतना ही कहूंगा कि हम बहुत साल से इंतजार कर रहे हैं । इस बार सुनहरा मौका है । पूल में इंग्लैंड ही थोड़ी कठिन टीम है । अगर हम शीर्ष रह सकें तो पूल ए से अर्जेंटीना से खेलना पड़ सकता है, जिसे हम पहले हरा चुके है । सेमीफाइनल की राह आसान है ।''

उन्होंने कहा ,''जाओ और अपनी सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलो, खेल का पूरा मजा लो और 50 साल का ये इंतजार खत्म करो । ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा । अपेक्षाओं का दबाव भूल जाओ, मैदान के बाहर की बातों को भूल जाओ और पोडियम पर जगह बनाओ ।''

भाषा मोना सुधीर

सुधीर

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: IBC24