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कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति ने किसान समूह से की चर्चा, किसानों ने दिए कई सुझाव

नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) नये कृषि कानूनों को लेकर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति ने मंगलवार को आल इंडिया किसान कोआर्डिनेशन कमेटी (एआईकेसीसी) के प्रतिनिधियों के साथ मशविरा किया और गत वर्ष सितम्बर में लाये गए विधानों पर उनके विचार लिये। उच्चतम न्यायालय ने 12 जनवरी को तीन कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर दो महीने के लिए रोक लगा दी थी और समिति से हितधारकों से परामर्श करने के बाद एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

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विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान नये कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को कानूनी गारंटी देने की मांग को लेकर लगभग तीन महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। समिति ने एक बयान में कहा, ''हाल में बने कृषि अधिनियमों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति ने एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा, नयी दिल्ली में आज ऑल इंडिया किसान कोआर्डिनेशन कमेटी (एआईकेसीसी) के पदाधिकारियों के साथ बातचीत की।''

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समिति के सदस्यों ने बैठक में एआईकेसीसी के भाग लेने वाले पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि वे तीन कानूनों- कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर किसानों के (सशक्तीकरण और संरक्षण) का समझौता अधिनियम 2020 तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 पर अपने विस्तृत विचार दें।

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बयान में कहा गया, ''बैठक में शामिल ऑल इंडिया किसान कोआर्डिनेशन कमेटी के सभी पदाधिकारियों ने समिति के समक्ष उपरोक्त तीन कृषि अधिनियमों पर अपने विस्तृत विचार, सुझाव और प्रस्तुतियां दीं।'' तीन-सदस्यीय समिति ऑनलाइन और व्यक्तिगत, दोनों ही तरह से हितधारकों के साथ परामर्श कर रही है। अशोक गुलाटी, प्रमोद जोशी और अनिल घनवट समिति के सदस्य हैं।

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केंद्र और विरोध प्रदर्शन कर रहे 41 किसान यूनियनों के बीच ग्यारह दौर की वार्ता के बाद भी गतिरोध दूर नहीं हो सका है। सरकार ने कई रियायतों की पेशकश की है जिसमें कानून को 18 महीने तक निलंबित करना शामिल है, लेकिन यूनियनों ने इसे खारिज कर दिया है। पिछले साल दिसंबर में, एआईकेसीसी के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कृषि कानूनों को समर्थन देने के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी।

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