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ओडिशा में मेडिकल पीजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित

ओडिशा में मेडिकल पीजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित

IBC24 1 week ago

भुवनेश्वर/बरहमपुर, 31 जुलाई (भाषा) ओडिशा सरकार ने राज्य में मेडिकल स्नातकोत्तर (पीजी) परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच पर कथित रूप से प्रसारित होने के मामले की जांच के लिए शुक्रवार को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।

एक आदेश के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर सचिव बी.के. दास की अध्यक्षता में गठित समिति ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (ओयूएचएस), भुवनेश्वर द्वारा आयोजित पीजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच करेगी।

समिति में विशेष सचिव बी.के. मिश्रा और चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के संयुक्त निदेशक ए.के. साहू सदस्य हैं।

आदेश में कहा गया है, ''समिति तथ्यों का पता लगाएगी, यदि कोई चूक हुई है तो उसकी पहचान करेगी और दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।''

सरकार का यह कदम एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पांच सदस्यीय समिति द्वारा पीजी परीक्षा के प्रश्नपत्र की तस्वीरें परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर कथित रूप से प्रसारित होने के मामले की आंतरिक जांच शुरू करने के बाद उठाया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, 27 जुलाई को 2023-26 बैच के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की एक विषय की सैद्धांतिक परीक्षा के दौरान 'ऑल ओडिशा मेडिकल पीजी परीक्षा' के प्रश्नपत्र की तस्वीरें कथित रूप से सोशल मीडिया मंच पर अपलोड की गई थीं।

एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डीन-सह-प्राचार्य हरिकृष्ण दलाई ने बताया कि कॉलेज अधीक्षक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो आरोपों की जांच कर रही है। समिति 72 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

उन्होंने कहा कि समिति यह जांच करेगी कि प्रश्नपत्र एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के परीक्षा कक्ष से बाहर कैसे पहुंचा और यदि ऐसा हुआ तो इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

दलाई ने कहा कि समिति घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट देगी। उन्होंने बताया कि ओयूएचएस ने पीजी परीक्षाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने कहा कि परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन ले जाना, चाहे वह चालू हो, बंद हो या साइलेंट मोड में हो, जानबूझकर अनुचित साधन अपनाने और गंभीर अनुशासनहीनता का प्रयास माना जाएगा। यदि कोई विद्यार्थी मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के साथ पकड़ा जाता है तो ओयूएचएस के दिशा-निर्देशों के अनुसार उसके खिलाफ यूएफएम (अनुचित साधन अपनाने का मामला) दर्ज किया जाएगा।

कॉलेज प्रशासन ने मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने की चेतावनी दी है। नोटिस में कहा गया है कि परीक्षा परिसर में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, हेल्थ बैंड, ईयरफोन, प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर और लिखित सामग्री ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

नियमों के उल्लंघन पर उपकरण जब्त करने, परीक्षा रद्द करने, विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति को मामला भेजने और भविष्य की परीक्षाओं से वंचित करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

दलाई ने बताया कि शेष परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों के साथ तीन टीमें गठित की गई हैं। प्रवेश द्वार पर सुरक्षा कर्मियों द्वारा कड़ी जांच की जाएगी।

इससे पहले एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के डीन ने कहा था कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की तस्वीरें सामने आने को प्रश्नपत्र ''लीक'' नहीं कहा जा सकता, क्योंकि तस्वीरें परीक्षा के समय में ही सामने आई थीं।

अधिकारियों के अनुसार, 2023-26 बैच के एमएस/एमडी पाठ्यक्रम की जनरल सर्जरी की दूसरी परीक्षा का प्रश्नपत्र कुछ स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा बनाए गए व्हाट्सऐप समूहों में कथित रूप से साझा किया गया था। परीक्षा के दौरान कुछ मोबाइल नंबरों से उत्तर भी प्रसारित किए जाने के आरोप हैं।

यह मामला तब सामने आया जब भुवनेश्वर के एक निजी मेडिकल कॉलेज के एक छात्र ने प्रश्नपत्र की तस्वीरें मिलने की जानकारी दी। छात्र ने दावा किया कि उसे ये तस्वीरें एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के एक छात्र द्वारा बनाए गए व्हाट्सऐप समूह से मिली थीं।

मेडिकल पीजी परीक्षा के सैद्धांतिक प्रश्नपत्रों की शुरुआत 21 जुलाई को हुई थी। इस बैच की दो और परीक्षाएं एक और पांच अगस्त को निर्धारित हैं। एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कुल 154 विद्यार्थी परीक्षा दे रहे हैं।

इस मामले को लेकर विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में बार-बार प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं सामने आना सरकार की व्यवस्था पर नियंत्रण रखने में विफलता को दर्शाता है।

बीजद नेता और पूर्व मंत्री अरुण कुमार साहू ने आरोप लगाया कि ओडिशा में भाजपा सरकार के 24 महीनों के कार्यकाल में प्रश्नपत्र लीक की 23 घटनाएं सामने आई हैं, जो सरकार की विफलता को उजागर करती हैं।

बीजद के उपाध्यक्ष प्रताप जेना ने कहा कि जब नीट प्रश्नपत्र लीक मामले से पूरा देश प्रभावित हुआ है, ऐसे समय में ओडिशा में मेडिकल पीजी परीक्षा के प्रश्नपत्र के कथित लीक ने लोगों को चिंतित कर दिया है।

उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब देने, मामले की गहन जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

वहीं, कांग्रेस की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग के इस्तीफे की मांग की।

भाषा रवि कांत सुरभि

सुरभि

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