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फ्रेंचाइजी लीग बनाम अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर: बेहतर कार्यक्रम के लिए समिति बनाएगी आईसीसी

फ्रेंचाइजी लीग बनाम अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर: बेहतर कार्यक्रम के लिए समिति बनाएगी आईसीसी

IBC24 5 days ago

हमदाबाद, एक जून (भाषा) दुनिया भर में फ्रेंचाइजी क्रिकेट के तेजी से फैलने से चिंतित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) बोर्ड ने एक समिति बनाने को मंज़ूरी दे दी है जो एक ऐसा संतुलन बनाने की दिशा में काम करेगी जिससे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में कोई रुकावट नहीं आए।

वर्तमान में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) साल के कैलेंडर के दो महीने ले लेता है। इसके अलावा एसए20, आईएलटी 20, बीबीएल, बीपीएल, एसएलपीएल, द हंड्रेड और सीपीएल दुनिया भर की कुछ प्रमुख लीग हैं। इसमें यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग भी जुड़ने वाली है जो इसी साल शुरू होगी। यह उन बेहतरीन टी20 खिलाड़ियों के लिए एक फायदेमंद करियर विकल्प बन जाएगा जो 'फ्रीलांसर' (स्वतंत्र) बनना चाहते हैं।

आईसीसी ने एक बयान में कहा, ''बोर्ड ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते दायरे पर चिंता जताई और मौजूदा ढांचे के भीतर अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर के साथ फ्रेंचाइजी क्रिकेट के तालमेल का आकलन करने के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया। ''

वेस्टइंडीज जैसे देशों के लिए यह खतरा असली है, जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ी बस टी20 क्रिकेट लीग में ही खेलना चाहते हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण निकोलस पूरन हैं जिन्होंने 30 साल की उम्र से पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। हेनरिक क्लासेन भी लीग में अपना जलवा दिखा रहे हैं, लेकिन उन्होंने भी अपने दक्षिण अफ़्रीकी करियर को अलविदा कह दिया है।

सुनील नारायण को तो वेस्टइंडीज की जर्सी पहनने में कभी कोई खास दिलचस्पी ही नहीं रही, यहां तक कि टी20 लीग में भी नहीं।

इतनी सारी लीग होने की वजह से आईसीसी का द्विपक्षीय श्रृंखलाओं से जुड़ा भविष्य दौरा कार्यक्रम (एफटीपी) भी प्रभावित होने के कगार पर है। हालांकि, भारत इसका अपवाद है क्योंकि वह अपने मौजूदा पंजीकृत प्रथम श्रेणी खिलाड़ियों को दूसरी लीग में खेलने की इजाजत नहीं देता।

इससे पहले, पिछले कुछ वर्षों में आईसीसी की अलग-अलग समितियों ने यह प्रस्ताव रखा था कि एक खिलाड़ी एक सत्र में कितनी लीग में बतौर 'फ्रीलांसर' खेल सकता है, इसकी एक सीमा तय होनी चाहिए और साथ ही उसे अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी निभाना चाहिए।

भाषा नमिता आनन्द

आनन्द

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