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सरकार ने अल नीनो की तैयारी तेज की, फसल निगरानी समूह बनाए

सरकार ने अल नीनो की तैयारी तेज की, फसल निगरानी समूह बनाए

IBC24 1 week ago

यी दिल्ली, एक जून (भाषा) अल नीनो के कारण सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमानों के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि कृषि मंत्रालय ने खरीफ फसलों पर होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए फसल-मौसम निगरानी और संकट प्रबंधन समूह बनाए हैं, साथ ही राज्य सरकारों को एक संकट प्रबंधन योजना भी भेजी है।

पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में हुई अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में, भोजन और उर्वरक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर भी चर्चा की गई।

राज्यों से कहा गया है कि वे बीजों का एक प्रतिशत आरक्षित रखें, जिसमें कम और मध्यम अवधि वाली किस्मों पर विशेष जोर दिया जाए।

खरीफ मौसम के लिए उर्वरक का स्टॉक, जरूरत का 51 प्रतिशत है - जो कि पारंपरिक रूप से रखे जाने वाले 33 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। ऐसा पहले से स्टॉक करने और बेहतर लॉजिस्टिक प्रबंधन के कारण संभव हुआ है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग का दक्षिण-पश्चिम मानसून का ताजा पूर्वानुमान सामान्य मानसून का लगभग 90 प्रतिशत है, जो एक सामान्य से कम सत्र और फसलों पर बढ़ते जोखिम के दबाव का संकेत देता है। यह स्थिति तब और गंभीर हो सकती है, जब सत्र के बाद के हिस्से में अल नीनो की स्थितियां और मजबूत हो जाएं।

खाद्य और उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा, ''एक फसल-मौसम निगरानी समूह बनाया गया है, जो हर सोमवार को बारिश के रवैये, बुवाई की प्रगति, जलाशयों की स्थिति, जरूरी चीजों की उपलब्धता, कीटों के प्रकोप और कीमतों के रुझान का अध्ययन करने के लिए बैठक करता है।''

राहत आयुक्तों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को मिलाकर एक अलग संकट प्रबंधन समूह भी बनाया गया है।

कृषि मंत्रालय आईसीएआर के सहयोग से जिला-स्तरीय आकस्मिक योजनाएं तैयार कर रहा है, और मानसून की तैयारियों को लेकर राज्य के अधिकारियों के साथ नियमित रूप से वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिये बातचीत कर रहा है।

अल नीनो के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए, कृषि मंत्रालय ने उर्वरक की मांग के अनुमान को कम कर दिया है।

खरीफ फसल वर्ष 2026-27 के लिए यूरिया की मांग 194 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से चार लाख टन कम है। वहीं, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की मांग में छह लाख टन की कटौती की गई है, जिससे यह अब 60 लाख टन रह गई है।

उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद, घरेलू स्तर पर उर्वरक का उत्पादन 104.81 लाख टन रहा और 27.62 लाख टन का आयात किया गया। इस तरह, कुल मिलाकर उपलब्ध स्टॉक में लगभग 132.43 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है। देश ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोतों से 25 लाख टन यूरिया और 50 लाख टन डीएपी भी हासिल कर लिया है, जिसके जून-जुलाई में आने की उम्मीद है। 70 लाख टन यूरिया के लिए एक वैश्विक निविदा अभी जारी किये जाने की प्रक्रिया में है।

खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर, एक जुलाई तक गेहूं का स्टॉक 513 लाख टन था, जबकि बफर नियम के अनुसार यह 275 लाख टन होना चाहिए। वहीं चावल का स्टॉक 397 लाख टन था, जबकि नियम के अनुसार यह 135 लाख टन होना चाहिए। यह जानकारी खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामले मंत्रालय की संयुक्त सचिव सी. शिखा ने दी।

मिश्रा ने आगे बताया कि अनाज, दालों और चीनी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि आलू, प्याज और टमाटर की कीमतें एक दायरे में हैं। जरूरी चीजों की कीमतों में कोई असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिला है।

खाद्य तेल की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। इसे इंडोनेशिया और मलेशिया (पाम तेल), रूस और यूक्रेन (सूरजमुखी तेल), तथा अर्जेंटीना और ब्राजील (सोयाबीन तेल) से होने वाले नियमित आयात से मदद मिल रही है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

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