K Annamalai: तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के सियासी भविष्य को लेकर बाजार में अफवाहों का दौर एक बार फिर गर्म हो गया है. सोमवार को जब वे चेन्नई से दिल्ली के लिए रवाना हुए, तो उन्होंने उन खबरों को सिरे से खारिज नहीं किया जिनमें दावा किया जा रहा है कि वे अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी में हैं.
जब पत्रकारों ने उनसे नई पार्टी बनाने को लेकर चल रही चर्चाओं पर सीधा सवाल किया, तो अन्नामलाई ने रहस्यमयी अंदाज में कहा, ‘कृपया थोड़ा इंतजार कीजिए. हम दो दिनों में एक साथ बैठेंगे और इस पर खुलकर बात करेंगे.’
कोयंबटूर में लगे पोस्टरों ने बढ़ाई राजनीतिक तपिश
हाल ही में संपन्न हुए 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि पूर्व आईपीएस अधिकारी अब एक नए सियासी सफर की शुरुआत कर सकते हैं. अन्नामलाई के इस ताजा बयान ने इन अटकलों को और हवा दे दी है.
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इस बीच अन्नामलाई के जन्मदिन से ठीक पहले कोयंबटूर में उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए बड़े-बड़े पोस्टरों ने इस चर्चा को और हवा दे दी है. शहर के प्रमुख चौराहों और इलाकों में लगे इन पोस्टरों पर ‘हमारे नेता, आइए और हमारा नेतृत्व कीजिए’ जैसे नारे लिखे हैं. राजनीतिक पंडित इसे समर्थकों द्वारा किए जा रहे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं’
दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ समय से तमिलनाडु में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा रहे अन्नामलाई ने इन खबरों पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है उन्होंने न तो इसका खंडन किया है और न ही इसकी पुष्टि की है.
IPS की नौकरी छोड़ चमकाया था सियासत
साल 2020 में आईपीएस की नौकरी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए अन्नामलाई ने बहुत कम समय में पार्टी के भीतर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई. साल 2021 से 2025 तक वे तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष रहे. अपनी आक्रामक राज्यव्यापी यात्राओं, जमीनी अभियानों और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के दम पर वे राज्य के सबसे चर्चित नेताओं में शुमार हो गए.
कहां से शुरू हुई दूरियां?
अन्नामलाई के अगले कदम को लेकर सवाल 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही उठने लगे थे. बताया जा रहा है कि अन्नामलाई कोयंबटूर सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें वहां से टिकट नहीं दिया. इसके अलावा, नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए केंद्र सरकार की त्रिभाषा नीति (Three-Language Policy) को जल्द लागू करने के फैसले पर अन्नामलाई ने खुलकर आलोचना की थी. इस बयान के बाद से ही यह कयास लगाए जाने लगे कि उनके और केंद्रीय नेतृत्व के बीच कुछ अनबन चल रही है.
हालांकि, बीजेपी के वरिष्ठ नेता इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि अन्नामलाई को जो पहचान मिली है, वह पार्टी की बदौलत ही है और वे आज भी पूरी तरह से बीजेपी के प्रति समर्पित हैं.

