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Bihar: खगड़िया में स्कूल के चापाकल से निकली मरी हुई छिपकली, छात्रों और परिजनों ने काटा बवाल, जड़ दिया ताला

Bihar: खगड़िया में स्कूल के चापाकल से निकली मरी हुई छिपकली, छात्रों और परिजनों ने काटा बवाल, जड़ दिया ताला

Bihar News: बिहार के खगड़िया सदर प्रखंड के बलौर गांव के मध्य विद्यालय में चापाकल से मरी हुई छिपकली निकलने के बाद जमकर हंगामा हुआ. सोमवार को विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सचिव और बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल पहुंचे और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया.

विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश शर्मा और सचिव ज्योति कुमारी ने बताया कि स्कूल में केवल दो चापाकल हैं. इनमें एक लंबे समय से खराब पड़ा है. दूसरे चापाकल से पानी रिसता रहता है और उसी के अंदर मृत अवस्था में छिपकली मिलने की बात सामने आई.

आरोप है कि इसके बाद भी बाहर से पानी डालकर चापाकल को चलाने की कोशिश की जाती रही, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया. ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में स्वच्छ पेयजल की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. ऐसे में बच्चे उसी चापाकल के पानी पर निर्भर थे. उनका आरोप है कि यदि समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ सकती थी.

ग्रामीणों ने इसे विद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया. उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.

सिर्फ पानी नहीं, बिजली और सुरक्षा पर भी फूटा गुस्सा

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने विद्यालय की दूसरी समस्याओं को भी सामने रखा. उनका कहना है कि स्कूल में आज तक बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है. गर्मी के मौसम में बच्चे बिना पंखे के पढ़ाई करने को मजबूर रहते हैं.

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि विद्यालय के बिल्कुल बगल से नदी गुजरती है. छुट्टी के समय कई बच्चे नदी की ओर चले जाते हैं, जिससे हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है. इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं.

डीएम से जांच और कार्रवाई की मांग, समाधान तक नहीं खुलेगा स्कूल

ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक अंजनी कुमार पर समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पेयजल, बिजली और सुरक्षा जैसे मुद्दों की जानकारी कई बार दी गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने जिला पदाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, स्वच्छ पेयजल की तत्काल व्यवस्था करने, खराब चापाकल की मरम्मत, बिजली उपलब्ध कराने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक सभी बुनियादी सुविधाएं बहाल नहीं होतीं, तब तक विद्यालय में लगा ताला नहीं खोला जाएगा.

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