Emotional Bidai Song: कुछ गाने सिर्फ सुने नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं. उनकी धुन कानों तक पहुंचते ही दिल में छिपी कोई पुरानी याद दस्तक देने लगती है. हिंदी सिनेमा ने ऐसे अनगिनत गीत दिए हैं, जो अलग-अलग रिश्तों और जज्बातों को आवाज देते हैं.
कुछ गाने ऐसे भी होते हैं, जिनका रिश्ता किसी एक दौर से नहीं होता. वक्त गुजरता रहता है, पीढ़ियां बदल जाती हैं, मगर उन गानों का दर्द और भावनाएं वैसी ही रहती हैं. ऐसा ही एक गीत है ‘बाबुल का ये घर बहना’.
ये गीत साल 1989 में आई फिल्म ‘दाता’ का है, जो आज भी बेटियों की विदाई में बजता है. शादी के बाद जब बेटी अपने मायके की चौखट छोड़ती है, तो इस गाने की आवाज माहौल को और भी भावुक कर देता है. कई बार गाना शुरू होते ही वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो जाती हैं.
मिथुन और पद्मिनी पर फिल्माया गया था गाना
फिल्म ‘दाता’ के इस लोकप्रिय गीत में मिथुन चक्रवर्ती और पद्मिनी कोल्हापुरी नजर आए थे. गाने की कहानी भी भाई-बहन के रिश्ते और बेटी की विदाई की भावनाओं को सामने रखती है. गीत में भाई अपनी बहन को विदा करते हुए उसे नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं देता है. वह उसे समझाता है कि मायका जिंदगी भर का ठिकाना नहीं होता. बेटी को एक दिन अपने नए घर जाना ही होता है. यही बात इस गाने को खास बनाती है. इसमें सिर्फ विदाई का दुख नहीं है बल्कि उस दुख के साथ बहन के लिए प्यार, चिंता और ढेरों दुआएं भी छिपी हैं.
अल्का याग्निक और किशोर कुमार की आवाज
इस गीत को अल्का याग्निक और किशोर कुमार ने आवाज दी है. दोनों की आवाज ने गीत की भावनाओं को और गहरा बना दिया. गीत के बोल असद भोपाली ने लिखे थे जबकि इसका संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था. 1989 में रिलीज हुई फिल्म ‘दाता’ को आए करीब 37 साल हो चुके हैं। इतने लंबे वक्त में बॉलीवुड में संगीत का अंदाज कई बार बदला. नए दौर के गाने आए, नई पीढ़ी के संगीतकार और गायक आए लेकिन ‘बाबुल का ये घर बहना’ की जगह विदाई के मौकों से पूरी तरह खत्म नहीं हुई. आज भी शादी-ब्याह में जब बेटी की विदाई का वक्त आता है, तो यह गीत कहीं न कहीं सुनाई दे जाता है.

