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NFHS-6 Report: तंबाकू से तो जीती जंग, पर शराब की लत ने और डुबोया; बिहार में एक-एक चीज की 'ग्राउंड रियलिटी' बता रहे आंकड़े!

NFHS-6 Report: तंबाकू से तो जीती जंग, पर शराब की लत ने और डुबोया; बिहार में एक-एक चीज की 'ग्राउंड रियलिटी' बता रहे आंकड़े!

बिहार में शराबबंदी के कड़े कानून लागू हुए लगभग 1 दशक से ज्यादा बीत चुका है लेकिन ग्राउंड लेवल की हकीकत से शायद सरकार और कानून दोनों ही बेखबर हैं इसलिए राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की ताजा रिपोर्ट 29 नई को जारी कर दी गई है, जिसने राज्य में सोशल और हेल्थ सिस्टम का खुलासा किया है.

NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि बेशक राज्य में शराब बैन हो गई है लेकिन शराब पीने वालों की तादात दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी बेफिक्र होकर एल्कोहॉल ले रहे हैं. ये लत शहरों से ज्यादा ग्रामीण इलाकों में हावी हो रही है. राज्य की हिंसा दर में भी 0.3 फीसदी का इजाफा हुआ है, जिसमें शहरों में प्रताड़ना झेल रही महिलाओं की संख्या 2.1 फीसदी पहुंच चुकी है. इसमें 18-49 साल की 5.4 फीसदी गर्भवती महिलाएं हैं, जो हैरानी की बात हैं.

शराब बैन के बावजूद बढ़ी खपत?

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिहार में 15-65 वर्ष की आयु के लगभग 16.5 पुरुष अभी भी शराब का सेवन कर रहे हैं. चौंकाने वाली बात तो यह है कि पिछले साल जारी NFHS-5 की रिपोर्ट में शराब के आदि पुरुषों का आंकड़ा 15.4 प्रतिशत था, लेकिन कड़ी कानून व्यवस्था के बावजूद बिहार में शराब पीने वालों की संख्या घटने बजाए 1.1 फीसदी बढ़ गई है.

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ग्रामीण इलाकों में ज्यादा बुरा हाल

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 से यह बात भी सामने आई है कि शहरों में तो फिर भी कानून व्यवस्था की सख्ती के चलते एल्कोहॉल से जुड़े मामलों में राहत है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में साल दर साल शराब के नाम पर जहर की लत जिंदगियां तबाह कर रही है. आंकड़ों पर नजर डालें तो शहरों में शराब पीने वालों की संख्या 12.8 फीसदी है, जबकि गांव में अवैध शराब नाबालिगों को निगलने में लगी है. यहां 15 साल से ज्यादा उम्र के लगभग 17.1 प्रतिशत पुरुष एल्कोहॉल ले रहे हैं. जिसके पीछे पुलिस की निगरानी में कमी और कानून व्यवस्था में सेंध बताई जा रही है.

तंबाकू खाने वाले हुए कम

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों में बिहार की महिलाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई है. रिपोर्ट से पता चला है कि जहां राज्य की 5% महिलाएं तंबाकू का सेवन करती थीं, वहां इस साल सिर्फ 4% महिलाएं ही तंबाकू ले रही हैं, जबकि महिलाओं की 1 फीसदी आबादी तंबाकू की लत से बाहर आ चुकी है. बेशक ये आंकड़ा काफी छोटा है, लेकिन राज्य के पुरुषों ने तंबाकू पर जीत हासिल कर ली है. राज्य में शराब के आंकड़े बढ़े हैं तो तंबाकू खाने वालों की संख्या में 3 से 4 फीसदी तक कमी आई है.

डायबिटीज से जूझ रहीं महिलाएं

NFHS-6 की रिपोर्ट ने महिलाओं के स्वास्थ्य हालातों पर प्रकाश डाला है. आंकड़ों से पता चला है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में 7 फीसदी महिलाएं डायबिटीज से पीड़ित है. इसमें 15 साल या इससे अधिक आयु वाली महिलाएं 6.2 फीसदी हैं, जबकि डायबिटिक पुरुष 8 फीसदी हो चुके हैं. इनमें 140 से 160 मिलीग्राम तक ब्लड़ शुगर लेवल दर्ज हुआ है. शहरी इलाकों में डायबिटीज से पीड़ित महिलाएं गांव से ज्यादा लगभग 7.3 फीसदी है, जबकि स्टेट लेवल पर 7.9 फीसदी पुरुष डायबिटीज से जूझ रहे हैं. हालांकि पिछले साल के मुकाबले मधुमेह के आंकड़ों मे कुछ राहत देखने को मिली है.

सिजेरियन डिलीवरी बनी महिलाओं की पसंद

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की रिपोर्ट से सामने आया है कि अब राज्य की महिलाएं दर्दनाक नॉर्मल डिलीवरी के बजाए सुरक्षित प्रसव चुन रही हैं. सर्वे से पता चला है कि सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली महिलाओं की संख्या 9.7 फीसदी से बढ़कर 13.2 फीसदी हो गई है. प्राइवेट अस्पतालों में आंकड़ा 39.6 फीसदी से बढ़कर 49.3 फीसदी हो गया है जबकि सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के मामले 3.5 फीसदी से घटकर 2.7 प्रतिशत दर्ज हुए हैं.

राज्य के अस्पतालों में प्रसव का आंकड़ा 76.2 प्रतिशत से बढ़कर 81.1 प्रतिशत दर्ज हुआ है. हालांकि शहरों में 89.9 फीसदी महिलाएं अस्पताल जाकर डिलीवरी कराती है, लेकिन गांव में अभी भी 80.2 प्रतिशत तक ही जागरुकता आई है. इसमें भी सरकारी अस्पतालों में 57.5 फीसदी डिलीवरी हो रही है, जिसके लिए 84 फीसदी ट्रेन्स हेल्थ प्रोफेशनल अपॉइंट किए गए हैं.

कमजोरी का शिकार हैं महिलाएं

ये कहना गलत नहीं होगा कि बिहार जैसे मेहनतकश राज्य की महिलाएं दिन रात एक करके मजदूरी करती हैं, घर चलाती हैं और बच्चे पालती हैं लेकिन फिर भी 27.1 फीसदी महिलाएं अपना औसत वजन अचीव नहीं कर पा रहीं. सर्वे से पता चला है कि जहां गांव की महिलाएं दुबलेपन से जूझ रही हैं तो वहीं शहर की 30 फीसदी महिलाओं ने वेट गेन किया है, जबकु पुरुषों का आंकड़ा 29.9 फीसदी है.

इस रिपोर्ट में ग्रामीण इलाकों में बदलती स्वास्थ्य सुविधाओं की सूरत पर भी बात की गई है. बिहार में लगबघ 619 वेलनेस सेंचर चल रहे हैं, जिनका संचालन और निगरानी हेल्थ डिपार्टमेंट से जुड़ी संस्था जपाइयो कर रही है. NFHS-6 की रिपोर्च में बताया गया है कि राज्य के 98 फीसदी घरों में बिजली और 99.8 फीसदी घरों में पीने का पानी पहुंच गया है.

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