Electric Scooter Performance: पिछले कुछ समय में देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ी है. इलेक्ट्रिक कार लेने के साथ-साथ लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर लेना भी काफी पसंद करते हैं.
शहरों में छोटी दूरी तय करने, रोजाना ऑफिस आने-जाने से लेकर लंबे रूट पर जाकर पैसे बचाने के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर काफी किफायती माना जाता है. लेकिन जैसे ही बात पहाड़ी इलाकों और चढ़ाई वाले रास्तों की आती है, कई बार लोगों के इन स्कूटर्स को लेकर सोच थोड़ी बदल जाती है.
समतल सड़क पर जिस इलेक्ट्रिक स्कूटर की रफ्तार और रेंज शानदार लगती है, यह पहाड़ी इलाकों में उतनी ही बदल जाती है. चलिए जानते हैं क्या पहाड़ी इलाकों में ऐसे स्कूटर लेने चाहिए.
पहाड़ों पर कम हो जाती है टॉर्क और रेंज
देखा जाए तो पहाड़ी रास्तों के लिए एक अच्छा और दमदार टॉर्क बेहद जरूरी होता है. आसान भाषा में टॉर्क को मोटर की खींचने की क्षमता से समझा जा सकता है. जब स्कूटर को समतल सड़क पर चलाना होता है तो मोटर पर एक तरह का लोड होता है. लेकिन जब वही स्कूटर ऊपर की ओर चढ़ता है तो उसे चढ़ाई के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है. इसलिए ऐसे में स्कूटर को सामान्य के मुकाबले ज्यादा टॉर्क की जरूरत पड़ती है. आमतौर पर पहाड़ों में इलेक्ट्रिक स्कूटर ज्यादा टॉर्क नहीं जनरेट कर पाता है. इसके अलावा पहाड़ों पर इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज भी कम हो जाती है.
पहाड़ों पर इलेक्ट्रिक स्कूटर लें या नहीं?
अब बहुत से ग्राहकों के मन में यह बात या सवाल जरूर आता है कि क्या पहाड़ों पर इलेक्ट्रिक स्कूटर लेना सही है या फिर नहीं. देखा जाए तो अगर आपके दिनभर की रनिंग 20 से 40 किलोमीटर की है और आपके घर में या फिर आसपास के इलाके में चार्जिंग का इंतजाम है तो ऐसे में इलेक्ट्रिक स्कूटर आपके लिए सही रहेगा. लेकिन, चार्जिंग के इंतजाम सही नहीं है और आपकी रनिंग भी ज्यादा है तो इसे लेने से बचें.

