Ramayana Facts: हिन्दू महाकाव्य रामायण तमाम रोचक प्रसंगों का खजाना है. इसमें तमाम ऐसे प्रसंग भी समाहित हैं, जिसके बारे में या तो लोग जानते नहीं हैं या फिर कम जानते हैं. रामायण की कथा में रावण, सीता, राम और लक्ष्मण जैसे प्रमुख पात्रों के बारे में तो लगभग हर कोई जानता है, लेकिन लंका के इस शक्तिशाली परिवार से जुड़े कुछ ऐसे प्रसंग भी हैं, जिनका जिक्र आमतौर पर कम होता है.
ऐसा ही एक रोचक प्रसंग है राक्षसी शूर्पणखा के पति विद्युत्जिह्वा का. आखिर वह कौन था? रावण ने अपनी ही बहन के पति को क्यों मार डाला? क्या इस घटना का शूर्पणखा के जीवन पर कोई असर पड़ा? इन सवालों ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है.
हाल ही में फिल्म रामायणम के ट्रेलर में विद्युत्जिह्वा के किरदार की चर्चा के बाद यह पुराना प्रसंग फिर सुर्खियों में है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में अभिनेता विवेक ओबेरॉय विद्युत्जिह्वा की भूमिका में नजर आ रहे हैं.
कौन था शूर्पणखा का पति विद्युत्जिह्वा?
कई रामायण परंपराओं में विद्युत्जिह्वा को शूर्पणखा का पति बताया गया है. उसे कालकेय दानवों के कुल से जुड़ा शक्तिशाली योद्धा माना जाता है. कुछ कथाओं में उसका उल्लेख बेहद पराक्रमी और युद्ध-कुशल योद्धा के रूप में मिलता है. यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है, क्योंकि कालकेय दानव और राक्षसों के बीच संबंध हमेशा सहज नहीं माने जाते थे. कुछ लोक परंपराओं में बताया गया है कि, शूर्पणखा ने परिवार की इच्छा के बिना यानी गुपचुप विद्युत्जिह्वा से विवाह किया था. इस विवाह से रावण नाराज था.
रावण ने बहनोई को क्यों मार डाला?
वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में रावण की दिग्विजय से जुड़े प्रसंग में विद्युत्जिह्वा का उल्लेख आता है. कथा के अनुसार, रावण कालकेयों से युद्ध कर रहा था और इसी संघर्ष में उसने अपने बहनोई विद्युत्जिह्वा का भी वध कर दिया. एक विवरण में कहा गया है कि युद्ध के दौरान विद्युत्जिह्वा रावण के सैनिकों पर प्रहार कर रहा था और इसी बीच रावण ने उसे मार डाला. कुछ पौराणिक कथाओं में बताया गया कि, रावण शूर्पणखा के इस विवाह से पहले ही नाराज था और विद्युत्जिह्वा को अपना विरोधी मानता था. वहीं कुछ लोककथाओं में विद्युत्जिह्वा को रावण के खिलाफ षड्यंत्र करने वाला बताया गया है.
क्या पति की मौत के बाद शूर्पणखा रावण से नाराज थी?
कई लोकप्रिय कथाओं के अनुसार, शूर्पणखा के भीतर अपने पति की मृत्यु को लेकर रावण के प्रति गहरा आक्रोश था. कुछ आधुनिक व्याख्याओं में तो यहां तक कहा जाता है कि, बाद में शूर्पणखा ने रावण के विनाश की भूमिका तैयार करने में जानबूझकर योगदान दिया. हालांकि, इस दावे को वाल्मीकि रामायण का निर्विवाद तथ्य मानना सही नहीं होगा.
रामायण की आगे की कहानी से कैसे जुड़ा यह प्रसंग?
वनवास के दौरान शूर्पणखा की मुलाकात राम और लक्ष्मण से होती है. इसके बाद सीता पर हमला करने के प्रयास के प्रसंग में लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक और कान काटे जाने की घटना आती है. यही घटना आगे चलकर खर-दूषण के युद्ध और फिर रावण द्वारा सीता हरण की दिशा में कहानी को आगे बढ़ाती है.

