भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध के आर्थिक झटकों से अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों को बचाने के लिए अपने सोने के भंडार का एक हिस्सा बाजार में बेचा हो सकता है.
यह अनुमान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लगाया गया है.
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के एक ताज़ा विश्लेषण के मुताबिक, ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के सीनियर इंडिया इकोनॉमिस्ट अभिषेक गुप्ता ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि RBI ने संभवतः 22 मई को समाप्त हुए दो हफ्तों के दौरान लगभग 12 अरब डॉलर (1.14 लाख करोड़ )मूल्य का सोना बेचा और इस रकम से 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा संपत्तियां खरीदीं.
You Might Be Interested In
Sadhvi Satish Sail: कौन हैं मिस इंडिया वर्ल्ड 2026 साध्वी सतीश सैल? खूबसूरती देख चौंधिया जाएंगी आंखें
ये 4 सेक्स पोजीशन... जो भरपूर चरम सुख तक ले जाएंगी! Confidence और शरीर की Positivity भी करेंगी बूस्ट
कातिलाना फिगर और बोल्ड लुक! अफगानी मॉडल के बिकिनी लुक ने उड़ाए होश; हुस्न ने मचाई सनसनी
ड्यूटी बढ़ने के बावजूद आई गिरावट
अभिषेक गुप्ता ने रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया कि हाल ही में सरकार ने सोने पर आयात शुल्क बढ़ाया था, जिससे केंद्रीय बैंक के सोने और डॉलर के भंडार की कीमत बढ़नी चाहिए थी. लेकिन इसके उलट, RBI के सोने के भंडार के घोषित मूल्य में गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट साफ इशारा करती है कि RBI ने सोने की बिक्री की है.
रुपये को संभालने की कोशिश
सोने की यह कथित बिक्री यह दिखाती है कि नीति निर्माता ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) के बंद होने के चलते लगातार बाहर जा रही पूंजी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर कितने चिंतित हैं. इसके अलावा, चालू खाता घाटा बढ़ने के कारण रुपये पर भारी दबाव है, जिसे देखते हुए RBI सोने के मुकाबले नकदी यानी विदेशी मुद्रा को ज्यादा तवज्जो दे रहा है.
ब्लूमबर्ग न्यूज की एक पिछली रिपोर्ट के अनुसार, गवर्नर संजय मल्होत्रा रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे सभी जरूरी विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. विदेशी मुद्रा बाजार में RBI के इन कदमों का कुछ असर भी दिखा है. 20 मई को जब रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था, उसके बाद से इसने एशिया की अन्य मुद्राओं के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है. हालांकि, मंगलवार को रुपया 0.2 प्रतिशत गिरकर 95.36 के स्तर पर बंद हुआ.
कच्चे तेल और महंगाई का झटका
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक होने के नाते, भारत को ईरान युद्ध की वजह से महंगे हुए ईंधन और कमजोर होते रुपये के कारण भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है. इस संकट से निपटने और देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए सरकार ने भी कमर कस ली है. इसके तहत ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं और कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को दोगुने से भी ज्यादा कर दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्थितियां अनुकूल होते ही RBI फिर से अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने की कोशिश में जुट जाएगा.
चांदी के आयात पर भी कड़ाई
इसी सिलसिले में सरकार ने मंगलवार को चांदी के आयात से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है. अब चांदी के ग्रेन (दाने) और पाउडर को भी ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया है. इसका मतलब है कि अब 99.9% शुद्धता वाली चांदी के दानों, पाउडर या अन्य रूपों में आयात करने के लिए व्यापारियों को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से पहले वैध लाइसेंस या मंजूरी लेनी होगी.

