Sawan 2026: सावन का पवित्र महीना चल रहा है. ये भगवान भोलेनाथ को भी अतिप्रिय माना जाता है. 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है. इस दिन शिव जी का जलाभिषेक और पूजा करने के लिए मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिलेगी.
हर तरफ केवल शिव के जयकारें सुनाई देंगे. दूध, जल और पंचामृत से भोलेनाथ का पूरे भाव और श्रद्धा के साथ जलाभिषेक किया जाएगा. धतूरा, बेलपत्र और शमीपत्र अर्पित कर भक्त अपनी पूजा संपन्न करेंगे. माना जाता है कि ये सभी वस्तुएं भगवान शिव को अति प्रिय हैं.
भगवान शिव के परम भक्त
लेकिन क्या आप भगवान शिव के भक्त कनप्पा नायनार के बारे में जानते हैं. उनकी भक्ति और शिव की पूजा का तरीका बाकी लोगों से काफी अलग था. भगवान शिव उनकी भक्ति से इतने खुश हुए थे, कि दर्शन भी देने पहुंच गए थे. उनकी गिनती भोलेनाथ के सबसे बड़े भक्तों में की जाती है. उनका पूजा करने का तरीका धार्मिक मान्यताओं के काफी अलग था. लेकिन उनके मन में शिव के लिए अटूट प्रेम और समर्पण का भाव था.
कौन थे कन्नप्पा नायनार?
जानकारी के अनुसार, कन्नप्पा दक्षिण भारत के जंगलों में रहा करते थे. वह जंगल में शिकारी का काम करते थे. उनका पूरा जीवन घने जंगलों के बीच ही गुजरा. जिसके कारण उन्हें धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के जानकारी नहीं थी. न ही उन्हें पूजा की विधि और मंत्र का ज्ञान था. हालांकि, उनके दिल में भगवान शिव के लिए अटूट प्रेम था. उनके आस्था इतनी गहरी थी कि उन्होंने अपने प्रेम और सच्ची भक्ति से भगवान शिव को प्रसन्न किया.
कैसे शुरू की शिव भक्ति?
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक दिन कन्नपा शिकार की तलाश के लिए जंगल गया. तभी उसकी नजर वहां बने एक शिवलिंग पर पहुंची. उसे अहसास हुआ कि ये कोई मामूली पत्थर नहीं है. बल्कि कोई दिव्य शक्ति की प्रतिमा है. उसने तभी विचार किया कि वह अब से इसकी पूजा और सेवा करेगा. लेकिन उसे पूजा विधि का ज्ञान नहीं थी. लेकिन भगवान शिव के प्रेम में उसने अपनी सबसे प्यारी चीज शिव जी को अर्पित करने का विचार किया. उसने पूरे जीवन में शिकार ही किया था. जिसके कारण वह शिकार का कुछ हिस्सा शिव जी को अर्पित करता और बचा हुआ खा लिया करता था. उसके पास पानी के लिए भी कोई पात्र नहीं थी. जिस वजह से वह मुंह में पानी भरकर लाता था और शिवलिंग का अभिषेक किया करता था. वह रोजाना आसपास की सफाई भी करता था. उसका पूजा करने का तरीका बाकियों से काफी ज्यादा अलग था.
शिव जी ने ली भक्त की परीक्षा
एक बार कन्नप्पा ने देखा कि शिवलिंग की आंखों से खून बह रहा है. उसने अपने प्रभू को पीड़ा में देख बीना सोचे अपनी एक आंख निकालकर अर्पित कर दी. फिर दूसरी आंख से भी खून बहने लगा, तब कन्नप्पा ने दूसरी आंख भी अर्पित करने का विचार किया. दूसरी आंख निकालने से पहले उसने अपने पैर से जगह को चिह्नित किया, ताकि दृष्टि खत्म होने के बाद वह सही जगह आंख अर्पित कर सके. तभी शिवजी वहां प्रकट हो गए. उन्होंने कन्नप्पा को ऐसा करने से रोक दिया और प्रसन्न होकर मोक्ष का वरदान भी दिया.
आज भी अमर है कथा
बता दें कि, कन्नप्पा नायनार की इस अमर कथा का संबंध आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध श्रीकालहस्ती मंदिर से है. जहां आज भी लोग भगवान शिव और उनके भक्त के दर्शन के लिए जाते हैं.

