Second Solar Eclipse 2026 Date: साल 2026 का दूसरा या अंतिम सूर्य ग्रहण कब लगेगा? खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वाले हर इंसान का यह सवाल हो सकता है. तो बता दें कि, यह सूर्य ग्रहण आज से करीब 3 माह बाद श्रावण यानी सावन माह में लगने वाला है.
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जिसे दुनिया के कुछ हिस्सों में साफ तौर पर देखा जा सकेगा. हालांकि, भारत में यह नहीं दिखाई देगा. पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण हर बार किसी भी माह की अमावस्या तिथि को लगता है, जबकि चंद्र ग्रहण किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि को होता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राहु और केतु जब ग्रहों के राजा सूर्य का ग्रास करने का प्रयास करते हैं तो उस समय सूर्य ग्रहण लगता है.
वहीं, खगोलशास्त्र की मानें तो, सूर्य ग्रहण तब लगता है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है. ऐसा होने से सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता है. अब सवाल है कि, साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब है? सूर्य ग्रहण कब और क्यों लगता है? सूर्य ग्रहण का भारत में सूतक मान्य होगा या नहीं? इस बारे में बता रहे हैं गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-
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2026 के दूसरे सूर्य ग्रहण की तारीख
ज्योतिष मत के अनुसार, इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त दिन बुधवार को लगेगा. पंचांग के अनुसार उस दिन श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि होगा यानी सावन अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लगेगा.अगर समय की बात करें तो, रात में 09 बजकर 04 मिनट पर सूर्य ग्रहण लगेगा. इस सूर्य ग्रहण का समापन या मोक्ष 13 अगस्त गुरुवार को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर होगा.
कितने समय तक रहेगा राहु-केतु का प्रभाव
सूर्य ग्रहण यानी राहु और केतु का प्रभाव करीब 7 घंटे से अधिक रहेगा. बता दें कि, राहु और केतु की वजह से ही सूर्य ग्रहण लगता है. यह सूर्य ग्रहण 7 घंटे 21 मिनट तक रहेगा. इस वजह से सूर्य पर राहु-केतु का प्रभाव 7 घंटे से अधिक समय तक रहेगा.
चतुर्ग्रही योग में लगेगा सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण के समय में 4 ग्रह एक साथ होंगे, इस वजह से यह सूर्य ग्रहण चतुर्ग्रही योग में लगेगा. इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगने वाला है. उस समय कर्क राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु साथ होंगे. कर्क राशि में सूर्य और चंद्रमा समान अंशों पर गुरु और बुध के साथ विराजमान होंगे.
क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता है, तब उसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाता है. इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए सूतक से जुड़े नियम लागू नहीं होंगे. हिंदू धर्म में ग्रहण काल को आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है. इस दौरान भगवान का ध्यान, मंत्र जाप और पूजा-पाठ करना शुभ रहता है. इससे अलग ग्रहण के समय भोजन पकाना और खाना वर्जित माना जाता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगा स्नान या शुद्ध जल से स्नान करना अनिवार्य माना जाता है.

