Mk Stalin Kolathur Seat Result: कोलाथुर सीट पर स्टालिन की हार सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है. एक ओर जहां TVK ने अपनी ताकत दिखाई है, वहीं दूसरी ओर डीएमके के लिए यह नतीजा आत्ममंथन का मौका बन सकता है.अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस हार के बाद राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है.
कोलाथुर विधानसभा सीट इस बार पूरे देश की नजरों में थी. शुरुआती रुझानों से ही यहां कांटे की टक्कर देखने को मिल रही थी, लेकिन आखिरकार नतीजों ने सबको चौंका दिया.स्टालिन को इस सीट पर विजय थलपति की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के उम्मीदवार वी. एस. बाबू ने हराया. खास बात यह है कि बाबू कभी स्टालिन के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे.
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पुराने साथी ने दी कड़ी चुनौती
वी. एस. बाबू का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है. वह पहले डीएमके से जुड़े रहे और 2011 में कोलाथुर सीट पर स्टालिन के चुनाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी.बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और अलग राह पकड़ ली. इसी साल 2026 में उन्होंने विजय की पार्टी TVK का दामन थामा और सीधे अपने पुराने नेता के खिलाफ मैदान में उतर गए. अंततः उन्होंने इस मुकाबले को जीतकर सबको चौंका दिया.
स्टालिन का मजबूत गढ़ भी नहीं बचा
एम. के. स्टालिन इस सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके थे-2011, 2016 और 2021 में. यही वजह थी कि कोलाथुर को उनका अभेद्य किला माना जाता था.इस सीट का गठन 2011 में हुआ था और तब से लेकर अब तक स्टालिन ही यहां से विधायक रहे थे. लेकिन इस बार का चुनाव उनके लिए अलग साबित हुआ.
राजनीतिक विरासत और पहचान
स्टालिन तमिलनाडु की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. वे पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के बेटे हैं और उनके निधन के बाद 2018 में डीएमके की कमान संभाली थी.उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में मजबूत स्थिति बनाई, लेकिन इस हार ने उनके राजनीतिक सफर में एक बड़ा मोड़ ला दिया है.

