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Baby Do Die Do Review: क्या बिना बोले और सुने दर्शकों का ध्यान खींच पाईं हुमा कुरैशी? या कहानी ने बर्बाद कर दी एक्टिंग! पढ़ें रिव्यू

Baby Do Die Do Review: क्या बिना बोले और सुने दर्शकों का ध्यान खींच पाईं हुमा कुरैशी? या कहानी ने बर्बाद कर दी एक्टिंग! पढ़ें रिव्यू

In Khabar 1 week ago

फिल्म- बेबी डू डाई डूकलाकार- हुमा कुरेशी, चंकी पांडे, सिकंदर खेर, सीमा पाहवा, विद्या मालवदे, रचित सिंह
निर्देशक- नचिकेत सामंत
रिलीज डेट- 03 जुलाई 2026
रेटिंग- 2/5

नचिकेत सामंत के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बेबी डू डाई डू’ का ट्रेलर काफी शानदार, जिसे देखने के बाद लोगों की फिल्म के प्रति उत्सुकता बढ़ गई थी.

अब फिल्म रिलीज हो चुकी है. क्या फिल्म दर्शकों का ध्यान खींच पाई? क्या हुमा कुरैशी ने एक बार फिर से अपनी एक्टिंग का दीवाना बना लिया? या डायेरक्टर कहीं चुक गए. चलिए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं.

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी की बात करें, तो इसकी शुरुआत एक भयानक घटना से होती है. जहां बेबी (हुमा कुरैशी) और उसकी जुड़वा बहन भय के साये में रहती हैं. बेबी (बोल और सुन नहीं सकती हैं) की जुड़वा बहन की हत्या कर दी जाती है. इस घटना ने बेबी को झकझोर रख दिया था. फिर बेबी को पीएम जैन (चंकी पांडे) गोद ले लेता है. और वह उसे एक प्रोफेशनल हत्यारा बना देता है. बेबी लोगों को मारने के लिए एक छाते को प्रयोग करती है, जो किसी बंदूक से भी तेज और शांत है. हालांकि, वह उस हत्यारे के भी खोज में रहती है, जिसने उसकी बहन को बेरहमी से मारा था. यही उसका अंतिम लक्ष्य होता है. शहर में लगातार हो रहे मर्डर के कारण पुलिस को बेबी पर शक होता है. लेकिन इसी दौरान बेबी को प्यार हो जाता है और वह शादी कर लेती है. इसके बाद कहानी में असली मोड़ आता है. अब क्या वह अपनी बहन की हत्या का बदला ले पाएगी? कौन है उसका हत्यारा? इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

कैसी है एक्टिंग?

फिल्म में हुमा कुरैशी की एक्टिंग ठीक है. बिना डायलॉग बोले और सुने वो अपने अभिनय की छाप छोड़ती है. लेकिन कहीं-कहीं लगता है कि वो लीग से भटक रही हैं. हालांकि, उन्होंने ही फिल्म को कुछ हद तक संभाला है. चंकी पांडे कुछ जगह ठीक लगे हैं. वहीं, अन्य कलाकारों ने कुछ खास काम नहीं किया है.

डायरेक्शन कैसा है?

फिल्म की कहानी को निर्देशक सही से दिखाने में कामयाब नहीं हो पाया. पहला पार्ट बहुत श्लो है, लगता है कि जबरदस्ती फिल्म को बढ़ाने का काम किया गया है. कई बार तो लगता है कि फिल्म को एक घंटे में भी खत्म किया जा सकता था. क्लाइमैक्स सीन थोड़ा ठीक है. डायरेक्टर फिल्म के साथ न्याय नहीं कर पाया.

देखें या नहीं?

अगर आप हुमा कुरैशी के फैन हैं, तो यह फिल्म देख सकते हैं. साथ ही अगर आप धैर्य रखकर फिल्म देखते हैं, तो भी जा सकते हैं. नहीं, तो ओटीटी का इंतजार करिए, उस पर भी देख सकते हैं.

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