Chandigarh: अक्सर जब हम किसी बड़े ब्रांड का सामान खरीदते हैं तो यह सोचते हैं कि यह अच्छी क्वॉलिटी की होगी और उसका लाइफ स्पेन ज्यादा होगा. लेकिन सोचिए अगर आप किसी ब्रांडेड प्रोडक्ट को काफी पैसे खर्च करके खरीदते हैं और वो एक महीने भी सही से नहीं चले और कपंनी उसके बदले दूसरा प्रोडक्ट ना दें और ना ही पैसे रिटर्न करे तो आप खुद कितना ठगा हुआ महसूस करेंगे.
ऐसा ही एक मामला चंडीगढ़ से सामने आया है. जहां चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रनिंग शूज से जुड़ी शिकायत पर सुनवाई करते हुए स्पोर्ट्स फुटवियर कंपनी ASISC India को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार को दोषी मानते हुए 10,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का हुक्म सुनाया है.
क्या है पूरा मामला?
एक ग्राहक जिसका नाम अजल मलिक है, उसने मंहगे ब्रांड की जूते की खरीदारी की, लेकिन सिर्फ एक महीने के अंदर ही उन्हें दौड़ने और चलने में परेशानी हमसूस होने लगी. जांच के दौरान उन्हें पता चला कि जूतों का सोल एड़ी और किनारों से अलग हो चुका था. जिसके वजह से उन्हें जूते को इस्तेमाल करने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था. इसके बाद अलय मलिक जूते को लेकर शूज स्टोर पहुंचे, जहां शुरुआत में उनका क्लेम स्वीकर कर लिया गया.
लेकिन शूज का वहीं मॉडल स्टोर में ना रहने की वजह से उन्हें दूसरे जूते को चुनने के लिए कहा गया और एक्सचेंज फॉर्म पर साइन भी कराए गए. हालांकि, बाद में कंपनी ने जूते बदलने या पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया और सिर्फ क्रेडिट वाउचर देने की बात कही.
कोर्ट ने कंपनी को क्या कहा?
कंपनी ने कोर्ट में अपना बचाव करते हुए कहा कि जूतों में कोई खराबी नहीं था. अदालत ने सारी बातें सुनने के बाद कहा कि अगर आपके जूतों में किसी भी तरह की खराबी नहीं थी तो कंपनी ने क्लेम क्यों स्वीकार किया और एक्सचेंज फॉर्म क्यों साइन कराया. इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि जब कोई कंज्यूमर किसी मंहंगे ब्रांड के लिए बड़ी रकम खर्च करता है, तो वह उम्मीद करता है कि प्रोडक्ट अच्छे क्वॉलिटी की होगी. ऐसे में एक महीने में जूतों का खराब होने कंपनी की लापरवाही को दर्शाता है.
कोर्ट ने क्या फैसला लिया ?
कोर्ट ने कंपनी को आदेश दिया कि कस्टमर को जूतों की पूरी खरीद कीमत 6,499 रुपये वापस करे. इसके जूते जिस दिन खरीदे गए उस डेट से 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी अदा किया जाएगा. इसके साथ ही कोर्ट ने मानसिक परेशानी और कानूनी कार्रवाई में खर्च को देखते हुए ग्राहक को 10,000 रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि यह रकम कंपनी को 60 दिनों के अंदर ग्राहक को पेमेंट करनी होगी.

