Mahabharata Untold Story: भगवान श्रीकृष्ण की अजब-गजब लीला कौन नहीं जानता है. इस संसार को बचाने के लिए उन्होंने कई बार लीलाएं रचीं. कभी मोहिनी बने, कभी छलिया तो कभी रणछोड़ा. लेकिन एक बार तो उन्हें एक किन्नर से ही विवाह करना पड़ा, ताकि महाभारत में धर्म की विजय में कोइ बाधा न आए.
दरअसल, हिन्दू प्राचीन महाकाव्य महाभारत को कई भाषाओं में अनुवादित किया गया है. इस किताब के तमिल संस्करण में एक कथा मिलती है, जिसमें भगवान कृष्ण ने एक किन्नर से विवाह किया था, जो कोई और नहीं बल्कि अर्जुन का पुत्र था. उन्होंने ऐसा क्यों किया और क्या है पूरा प्रसंग, जानते हैं…
महाभारत की युद्धभूमि में एक ऐसा भी योद्धा था, जिसे पता था कि उसकी जिंदगी बस एक रात की मेहमान है. वह था इरावान, अर्जुन और नागकन्या उलूपी का पुत्र. कुरुक्षेत्र युद्ध शुरू होने से पहले इरावान ने पांडवों की विजय के लिए अपना जीवन बलिदान करने का संकल्प लिया. लेकिन, उसकी एक इच्छा थी कि, मृत्यु से पहले वह विवाह करना चाहता था. समस्या यह थी कि जो भी युवती उससे विवाह करती, उसे अगले ही दिन विधवा होना पड़ता. ऐसे में कोई भी राजकुमारी विवाह के लिए तैयार नहीं हुई. तब भगवान कृष्ण ने मोहिनी का रूप धारण कर किन्नर से विवाह किया. केवल विवाह ही नहीं किया, बल्कि उसकी मृत्यु होने के बाद उसकी विधवा बन विलाप भी किया. पढ़िए रोचक कथा-
कौन था इरावान?
इरावान को महाभारत की परंपराओं में अर्जुन और नागकन्या उलूपी का पुत्र था. वह बेहद सुन्दर और एक कुशल धनुर्धर और मायावी अस्त्रों का ज्ञाता था. युद्ध में उसने शकुनि के छः भाइयों का वध किया और बहुत से योद्धाओं को परास्त भी किया था. कुरुक्षेत्र के युद्ध में वह पांडवों की ओर से कौरवों के खिलाफ लड़ने पहुंचा था. कथा के अनुसार, कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों की जीत के लिए मां काली के सामने एक राजकुमार को बलि दी जानी थी. वो भी ऐसे व्यक्ति की, जिसमें 32 गुण हों. इस शर्त में केवल अर्जुन, भगवान कृष्ण और इरावान ही खरे उतर रहे थे. लेकिन, देवी के सामने बलिदान देने की इच्छा इरावान ने जताई.
बलिदान से पहले विवाह की शर्त
युद्ध में जाने से पहले इरावान ने देवी के सामने अपना बलिदान देने की इच्छा जताई. कहा जाता है कि, बलिदान से पहले इरावान ने शर्त रखी कि बलिदान से पहले उसका विवाह होना चाहिए. लेकिन, कोई भी कन्या ऐसे योद्धा से विवाह करने को तैयार नहीं थी, जिसकी मृत्यु अगले ही दिन निश्चित मानी जा रही थी.
तब श्रीकृष्ण ने धारण किया मोहिनी रूप
जब इरावान की इच्छा पूरी होने का कोई रास्ता नहीं दिखा तो श्रीकृष्ण ने मोहिनी रूप धारण करने का निर्णय लिया. मोहिनी रूप में श्रीकृष्ण ने इरावान से विवाह किया. इसके बाद इरावान और मोहिनी के विवाह की रात बीती. दोनों ने पति-पत्नी के रूप में समय बिताया. लेकिन, अगले दिन युद्धभूमि में इरावान ने अपने संकल्प के अनुसार बलिदान दे दिया.
पति की मृत्यु के बाद मोहिनी बने कृष्ण ने किया विलाप
लोकप्रचलित कथा के अनुसार, इरावान की मृत्यु के बाद मोहिनी बनीं श्रीकृष्ण ने एक पत्नी की तरह विलाप किया और शोक मनाया. उन्होंने अपना सुहाग खोने वाली स्त्री का रूप धारण कर इरावान की मृत्यु पर मातम मनाया. इस प्रसंग में श्रीकृष्ण का भाव यह दिखाता है कि उन्होंने केवल इरावान की इच्छा पूरी करने के लिए विवाह नहीं किया, बल्कि उसके अंतिम समय में उसे अकेला भी नहीं छोड़ा. इसी वजह से यह कथा त्याग, करुणा और भगवान के भक्त के प्रति प्रेम की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है.
एक रात की शादी बनी अनोखी परंपरा
इरावान की यही कथा आगे चलकर कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ गई. इसमें प्रेम से ज्यादा त्याग और स्वीकार का भाव दिखाई देता है. एक ऐसा योद्धा, जिसे अपनी मृत्यु का पहले से पता था, फिर भी उसने धर्म और युद्ध के लिए अपना जीवन समर्पित किया.
किन्नर क्यों करते हैं इरावान से विवाह?
इरावान को इरवन और अरावन भी कहा जाता है और उसकी देवता के रूप में पूजा भी होती है. समस्त किन्नर स्वयं को उसकी विधवा मानते हैं. एक 18 दिन के महोत्सव के दौरान हजारों किन्नरों द्वारा उनके देवता इरावान से विवाह किया जाता है, लेकिन अगले दिन ही मंगलसूत्र तोड़कर और महाविलाप के बीच इरावान की प्रतिमा को भंग कर किन्नरों द्वारा विधवा वेश धारण कर लिया जाता है. यह रस्म किन्नरों में बेहद पवित्र मानी जाती है. अरावन की अरावनियां (उनसे विवाह करने वाली किन्नर)’ अपनी पहचान ‘मोहिनी’ से करती हैं. उनका मानना है कि वो कृष्ण का स्त्री रूप हैं, यानी एक पुरुष के शरीर के अंदर फंसी हुई महिला.

