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Judge Story: कौन हैं यह जज, जो आधी तनख्वाह में करते हैं गुजारा, जीते हैं ऐसी लाइफ

Judge Story: कौन हैं यह जज, जो आधी तनख्वाह में करते हैं गुजारा, जीते हैं ऐसी लाइफ

In Khabar 2 weeks ago

Judge Story: आज के दौर में जहां अधिकतर लोग बेहतर सुविधाओं और आरामदायक जीवन की चाह रखते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के एडिशनल सेशन जज अक्षय कुमार द्विवेदी अपनी सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं.

उनकी जीवनशैली न केवल न्यायपालिका से जुड़े लोगों बल्कि आम नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है.

जानकारी के अनुसार, जज अक्षय कुमार द्विवेदी ने अपने पद से मिलने वाली कई सरकारी सुविधाओं का उपयोग न करने का फैसला किया है. वे सरकारी बंगले में रहने के बजाय एक साधारण एक कमरे के घर में रहते हैं. इतना ही नहीं, वे अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं और रोजाना पैदल ही अदालत पहुंचते हैं. उनकी यह सादगी बताती है कि उनके लिए पद से मिलने वाली सुविधाओं से अधिक महत्वपूर्ण उनका कर्तव्य और सेवा का भाव है.

जरूरत भर वेतन लेने की इच्छा

जज द्विवेदी की सबसे चर्चित बातों में से एक यह भी है कि उन्होंने कथित तौर पर अपनी मासिक सैलरी कम करने का अनुरोध किया. उनका मानना है कि व्यक्तिगत जरूरतों के लिए सीमित आय ही पर्याप्त है और जीवन का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ नहीं होना चाहिए. यह सोच उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाती है.

निजी अनुभव ने चुना न्याय का रास्ता

जज अक्षय कुमार द्विवेदी की सोच के पीछे एक भावनात्मक कहानी भी जुड़ी है. बचपन में उन्होंने अपनी मां को संपत्ति विवाद से जुड़े लंबे कानूनी संघर्ष से गुजरते देखा. वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने और मानसिक तनाव ने उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा. इसी अनुभव ने उन्हें न्यायपालिका में आने और लोगों को समय पर न्याय दिलाने की प्रेरणा दी.

संपत्ति और पारिवारिक मामलों पर विशेष ध्यान

बताया जाता है कि जज द्विवेदी विशेष रूप से संपत्ति विवाद और पारिवारिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने का प्रयास करते हैं. उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया के कारण अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े. उनका मानना है कि समय पर मिला न्याय ही वास्तव में प्रभावी न्याय होता है.

सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना

हाल के दिनों में उनकी जीवनशैली और कार्यशैली की चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई. कई लोगों ने उन्हें ईमानदारी, सादगी और निस्वार्थ सेवा का उदाहरण बताया. वहीं, कुछ लोगों ने उनके जीवन को यह संदेश देने वाला बताया कि सार्वजनिक पद की असली गरिमा सुविधाओं में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने के तरीके में होती है.

जज अक्षय कुमार द्विवेदी की कहानी यह दिखाती है कि सच्ची सेवा केवल बड़े पद या अधिकार से नहीं, बल्कि सोच, संवेदनशीलता और ईमानदारी से होती है. उनका जीवन उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने पेशे को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज की सेवा का माध्यम मानते हैं. सादगी, समर्पण और न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक अलग पहचान दिलाती है.

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