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कौन है रासेश्वरी देवी? ओडिशा और हरिद्वार में विशाल ध्यान शिविर की घोषणा की? जानें जगद्गुरु कृपालु महाराज से क्या है संबंध

कौन है रासेश्वरी देवी? ओडिशा और हरिद्वार में विशाल ध्यान शिविर की घोषणा की? जानें जगद्गुरु कृपालु महाराज से क्या है संबंध

In Khabar 2 days ago

Who is Raseshwari Devi: विश्व ध्यान दिवस 2026 के अवसर पर आध्यात्मिक गुरु ने दो बड़े आध्यात्मिक और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की घोषणा की है. इनमें ओडिशा में एक विशाल योग एवं ध्यान केंद्र का निर्माण और हरिद्वार में सप्ताहभर चलने वाला मेगा ध्यान शिविर शामिल है.

ये पहल वर्ष 1998 में रसेश्वरी देवी जी द्वारा स्थापित आध्यात्मिक एवं सेवाभावी संस्था के मार्गदर्शन में शुरू की गई हैं.

11 से 17 जून तक हरिद्वार में ध्यान शिविर आयोजित

संस्था के अनुसार, ओडिशा के खुर्दा जिले में भुवनेश्वर के निकट टांगी क्षेत्र में 1,500 से अधिक लोगों की क्षमता वाला आधुनिक योग एवं ध्यान हॉल बनाया जा रहा है. यह केंद्र भविष्य में ध्यान, योग शिक्षा, आध्यात्मिक साधना शिविरों और स्वास्थ्य आधारित सामुदायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में विकसित किया जाएगा. इसके अलावा, 11 से 17 जून 2026 तक हरिद्वार में एक विशाल ध्यान शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें लगभग 2,500 प्रतिभागियों के साथ कई विदेशी साधकों के शामिल होने की संभावना है. सप्ताहभर चलने वाले इस शिविर में निर्देशित ध्यान सत्र, योग दर्शन पर प्रवचन, स्वास्थ्य एवं जीवनशैली से जुड़े व्यावहारिक कार्यशालाएं और दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने पर संवाद आयोजित किए जाएंगे.

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कौन हैं रसेश्वरी देवी? (Who is Raseshwari Devi)

भारतीय आध्यात्मिक वक्ता, सनातन वैदिक दर्शन की प्रचारक और की संस्थापक-अध्यक्ष हैं. उनका जन्म भिलाई में हुआ था. उन्होंने गणित और अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की, लेकिन वर्ष 1988 में जगद्गुरु स्वामी श्री कृपालु जी महाराज के मार्गदर्शन में संन्यास मार्ग को अपनाया.पिछले तीन दशकों में उन्होंने भारत और विदेशों में आध्यात्मिक प्रवचन, ध्यान शिविर, युवा जागरूकता कार्यक्रम और सामाजिक सेवा अभियानों का नेतृत्व किया है. उनकी शिक्षाएं मुख्य रूप से श्रीकृष्ण भक्ति, उपनिषदों के ज्ञान, ध्यान साधना और मूल्य आधारित जीवन पर केंद्रित हैं.

आध्यात्मिक यात्रा और विचारधारा

रसेश्वरी देवी का पालन-पोषण एक धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ. उनके गुरु जगद्गुरु स्वामी श्री कृपालु जी महाराज ने उनके आध्यात्मिक जीवन को नई दिशा दी. साथ ही उनके पिता ने भी शास्त्रों और भक्ति दर्शन की शिक्षा देकर उनकी आध्यात्मिक नींव को मजबूत किया. उन्होंने उपनिषदों और श्रीकृष्ण भक्ति पर गहन अध्ययन किया और बाद में इन्हीं शिक्षाओं को सरल एवं व्यावहारिक रूप में समाज तक पहुंचाया. उनके प्रवचन आत्मअनुशासन, रिश्तों, भावनात्मक संतुलन, आत्मविकास और जीवन के उद्देश्य जैसे विषयों पर केंद्रित रहते हैं.

युवा और समाज के लिए कार्य

रसेश्वरी देवी जी ने बाल संस्कार शिविर और युवा उत्थान शिविर जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया है. ध्यान, योग और आध्यात्मिकता को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने की उनकी शैली युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय मानी जाती है. उनके योगदान के लिए उन्हें युवा मामलों के मंत्रालय सहित कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें "स्पिरिचुअल एंबेसडर" और "ग्लोबल पीस अवॉर्ड 2022" जैसे सम्मान भी प्राप्त हुए हैं.

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