Nariyal puja Astro tips: सनातन धर्म में किसी भी पूजा में श्रीफल यानी नारियल का बहुत महत्व होता है. श्रीफल में ‘श्री’ का अर्थ होता है लक्ष्मी और समृद्धि. कोई भी शुभ कार्य हो, ग्रह प्रवेश हो, विवाह हो या फिर अनुष्ठान, नारियल के बगैर वह अधूरा है.
इसलिए पूजा-पाठ में श्रीफल का प्रयोग बेहद शुभ माना जाता है. दरअसल सनातन परंपरा में श्रीफल शुभता, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है. बता दें कि, श्रीफल को पूजा के दौरान या तो कलश पर रखा जाता है या किसी कपड़े में लपेटकर या कच्चा सूता बांधकर पूजा स्थल पर रखा जाता है. लेकिन, लोग पूजा स्थल पर श्रीफल को किसी भी दिशा में रख देते हैं. असल में ऐसा करना गलत है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही दिशा और विधि से रखा गया श्रीफल सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल देने वाला माना जाता है. वहीं, गलत दिशा में रखने से घर में दरिद्रता और बीमारी का कारण बन सकता है. अब सवाल है कि आखिर, श्रीफल रखने की सही दिशा क्या है? सही दिशा में श्रीफल को रखकर पूजा करने से क्या होगा? महिलाएं नारियल क्यों नहीं तोड़ती हैं? आइए जानते हैं इस बारे में-
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श्रीफल का शास्त्रों में क्या जिक्र
‘अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय, ऊर्ध्वस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै.
प्राचीमुखं वित विनाशनाय, तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीकेलं’…
इसका मतलब है कि, नारियल का मुख नीचे की ओर रखने से शत्रुओं में वृद्धि होती है. नारियल का मुख ऊपर की ओर सीधा खड़ा रखने से रोग और बाधाएं बढ़ती हैं. पूर्व की तरफ मुख करके रखा गया नारियल धन-संपत्ति का विनाश करता है. शास्त्रों के अनुसार, कलश पर नारियल हमेशा इस तरह स्थापित करना चाहिए कि उसका मुख पूजा करने वाले व्यक्ति की तरफ हो. यह स्थिति अत्यंत शुभ और फलदायी मानी गई है. नारियल का मुख यानि नारियल का वह हिस्सा जहां तीन आंखें होती हैं या जो टहनी से जुड़ा होता है. नारियल का नुकीला हिस्सा उसका मुख नहीं कहलाता है.
नारियल को किस दिशा में रखकर पूजा करें
अगर दिशा की बात करें, तो श्रीफल (नारियल) को पूजा में रखते समय सबसे शुभ दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) मानी जाती है. यहाँ श्रीफल रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति आती है. उत्तर दिशा भी शुभ मानी जाती है. श्रीफल यहाँ रखने से परिवार में स्थिरता और शांति बनी रहती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है. इससे सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति बढ़ने की मान्यता है. दक्षिण दिशा में श्रीफल रखना अशुभ माना जाता है और इससे पूजा का फल कम हो सकता है. अगर कलश स्थापना की जा रही हो, तो कलश के ऊपर लाल कपड़े या आम के पत्तों के साथ श्रीफल स्थापित किया जाता है. श्रीफल का मुख (नुकीला भाग) ऊपर की ओर रखना शुभ माना जाता है.
महिलाएं क्यों नहीं फोड़तीं नारियल?
हिंदू मान्यता के अनुसार श्रीफल को बीज रूप में माना गया है, जो कि प्रजनन का कारक होता है. चूंकि स्त्रियां बीज रूप में गर्भ को धारण करके शिशु को जन्म देती हैं, इसलिए उनके द्वारा नारियल का फोड़ा जाना अशुभ माना जाता है. ऐसे में पूजा या किसी मांगलिक अवसर पर पुरुष ही नारियल फोड़ते हैं.

