Punjab Chunav 2027: पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Chunav 2027)को लेकर 2027 में वोटिंग होनी है. ऐसे में आज हम जलालाबाद विधानसभा सीट की बात करेंगे. जहां बादल परिवार का दबदबा रहा है.
यह सीट हॉट सीट है. क्योंकि यहां से शिरोमणि अकाली दल (SAD) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ा था. इस सीट पर 2009 से 2017 तक सुखबीर सिंह बादल की लगातार जीत होती रही है.
जलालाबाद का प्रतिधित्व सुखबीर बादल ही करते थे. 2017 में उन्हें इस विधानसभा सीट से फिर जीत मिली. हालांकि 2019 में फिरोजपुर से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने जलालाबाद विधानसभा सीट छोड़ दी. बाद में हुए उपचुनाव में यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई.
1997 में शेर सिंह बने थे विधायक
1997 में हुए विधानसभा चुनाव में पहली बार शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार शेर सिंह विधायक चुने गए थे. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी हंसराज को हराकर इस सीट में जीत हासिल की है, लेकिन 2002 के विधानसभा चुनाव में यह सीट अकाली दल के हाथों से फिसल गई. विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रहे हंसराज कांग्रेस पार्टी की टिकट पर लड़े और उन्होंने अकाली दल के विधायक शेर सिंह को हराया.
2007 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने फिर वापसी की और पार्टी के प्रत्याशी शेर सिंह विधायक बने. उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी हंसराज को हराया. 2012 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल ने सुखबीर सिंह बादल को इस सीट से टिकट दिया और उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी हंसराज को हराया. इस चुनाव में यहां कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही थी.
2022 में आप ने अकाली दल को हराया
2022 के विधानसभा चुनाव में जलालाबाद विधानसभा सीट में बड़ा उलटफेर देखने को मिला. जब पंजाब विधानसभा चुनाव में जलालाबाद विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) के जगदीप कंबोज ने 30 हजार से ज्यादा वोटों से सुखबीर सिंह बादल को हरा दिया. जलालाबाद सीट की बात करें तो इस अकाली दल का गढ़ कहा जाता है. लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने अकाली दल को हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया. सुखबीर सिंह बादल 2017 में यहां से विधायक चुने गए.
सुखबीर बादल की हार की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
सुखबीर पंजाब के पांच बार सीएम रहे प्रकाश सिंह बादल के बेटे है. इस चुनाव में सुखबीर सिंह बादल की हार की सबसे बड़ी वजह अकाली दल की सबसे पुरानी सहयोगी बीजेपी का अकेले चुनाव रहा. क्योंकि, इस विधानसभा चुनाव में अकाली दल और बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. जिसकी वजह से जलालाबाद विधानसभा सीट में आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की. इसके अलावा, पंजाब में अकाली दल के खिलाफ लोगों में गुस्सा भर गया था. जिसकी वजह से भी सुखबीर सिंह बादल को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा.

