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Subhash Chandra vs Mukesh Ambani: सुभाष चंद्रा का आरोप, ZEE को हड़पना चाहते थे अंबानी; रिलायंस ग्रुप ने बयान को बताया बेबुनियाद

Subhash Chandra vs Mukesh Ambani: सुभाष चंद्रा का आरोप, ZEE को हड़पना चाहते थे अंबानी; रिलायंस ग्रुप ने बयान को बताया बेबुनियाद

In Khabar 1 week ago

Subhash Chandra vs Mukesh Ambani: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने हाल ही में NCLT लोन सेटलमेंट मामले में अब उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक मुकेश अंबानी पर बड़ा हमला बोला है.

सुभाष चंद्रा ने निजी समाचार चैनल पर बयान दिया है कि मुकेश अंबानी के मीडिया नेटवर्क (NW18/CNBC) ने उनके NCLT मामले को लेकर गलत और भ्रमित करने वाली बातें फैलाई हैं. इसके साथ ही उन्होंने करीब-करीब धमकी देते हुए मुकेश अंबानी को इशारों-इशारों में कहा कि मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन आपके पास बहुत कुछ है. उन्होंने कहा कि अपने लोगों को रोकिये. वहीं, रिलायंस या मुकेश अंबानी की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी हुआ है.

रिलायंस ग्रुप ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की बेबुनियाद बातों पर निराशा जताई है. हम रिलायंस ग्रुप का हिस्सा रहे मीडिया संस्थानों पर लगाए गए आरोपों और इशारों का पुरज़ोर खंडन करते हैं. हमारे मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है और न ही कभी किया जाएगा. हम एक बिज़नेसमैन और एंटरप्रेन्योर के तौर पर सुभाष चंद्रा का बहुत सम्मान करते हैं. हम उनके अच्छे भविष्य की कामना करते हैं.

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को अपने खिलाफ पर्सनल इनसॉल्वेंसी के मामले में 6.5 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों ने इस मामले में 22,006.57 करोड़ रुपये की वसूली का मुकदमा किया था। चंद्रा ने जो रीपेमेंट प्लान दिया था, उस पर लेनदारों ने वोट देकर फैसला किया था। उस फैसले को नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत सही करार दिया। इस तरह हर 100 रुपये के दावे के मुकाबले केवल 3 पैसे के बराबर की रिकवरी होगी।

मुकेश अंबानी की ओर से ZEE को हथियाने की कोशिश

सुभाष चंद्रा का आरोप है कि मुकेश अंबानी ने जी (ZEE) समूह को हथियाने (टेकओवर) की कोशिश की थी. वर्ष 2019 में इस तरह चर्चा में मीडिया के गलियारों में गूंजी थी, जिसमें कहा गया था कि जी (ZEE) समूह को खरीदने के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने कोशिश की. इसमें मुकेश अंबानी भी शामिल था.

सुभाष चंद्रा ने यह भी कहा कि उन्होंने इस संबंध में मुकेश अंबानी को एक पत्र (चिट्ठी) भी लिखा है. उन्होंने उम्मीद है कि मुकेश अंबानी की ओर से उन्होंने फोन आएगा. सुभाष चंद्रा ने आरोप लगाया कि मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाले News 18 और CNBC समूह ने उनके और उनके जी (ZEE) समूह के खिलाफ तथ्यहीन और भ्रामक खबरें फैलाईं. उन्होंने कहा कि 22,000 करोड़ रुपये की बात कर गलत पेश करके फैलाया गया.

ज़ी को हथियाना चाहते थे मुकेश

सुभाष चंद्रा आरोप है कि मुकेश अंबानी ने अनैतिक तरीक से ज़ी को हथियाने की कोशिश की. उनका आरोप है कि इन्वेस्को के साथ मिलकर ज़ी का कब्जाने की कोशिश की गई.

क्या है पूरा मामला

सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों के एवज में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने उन्हें 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान की योजना को मंजूरी दी है. उधर, सुभाष चंद्रा के कार्यालय का कहना है कि उन्होंने खुद किसी भी लेंडर से सीधे तौर पर इतना बड़ा कर्ज नहीं लिया था, वह इस मामले में केवल पर्सनल गारंटर थे. उनकी ओर से दावा किया गया है कि उनकी मौजूदा कुल संपत्ति और वित्तीय स्थिति के अनुसार ही 6.5 करोड़ रुपये का रीपेमेंट प्लान प्रस्तुत किया गया था. अब इसे NCLT और कर्जदाताओं की प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया गया है.

क्यों फंसा पेंच

विवेक इंफ्राकॉन ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस (बाद में इसका नाम बदलकर सम्मान कैपिटल कर दिया गया) से 170 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. इसमें सुभाष चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी. वहीं, पैसा वापस नहीं मिलने पर इंडियाबुल्स ने सुभाष चंद्रा के खिलाफ कानूनी कदम उठाया. कानूनी कार्रवाई के चरण में वर्ष 2022 में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत NCLT में शिकायत की. इसमें दूसरे लेनदार भी जुड़ते चले गए. इसके बाद यह पूरा दावा करीब 22 हजार करोड़ रुपये का हो गया. 2024 में अपील मंजूर की गई थी. इसके लगातार इस मामले में NCLT में सुनवाई चल रही थी.

वहीं आरोप है कि इस प्लान पर LIC हाउसिंग फाइनैंस की अगुवाई में कुछ लेनदारों ने ऐतराज जताया, लेकिन उनका पलड़ा हल्का रहा. बताया जाता है कि वोटिंग का 80.8 प्रतिशत से अधिक अधिकार रखने वाले दूसरे लेनदारों ने इसका समर्थन किया था. यह मामला अब बहुमत की राय के हिसाब से ओरिजिनल डिवीजन बेंच के पास औपचारिक आदेश के लिए भेजा जाएगा.

नहीं लिया कोई उधार पैसा

गुरुवार (27 अगस्त, 2026) को इस मामले में सुभाष चंद्रा के ऑफिस की ओर से इस बारे में जारी बयान में कहा गया कि उन्होंने किसी भी लेंडर से कोई पैसा उधार नहीं लिया था. वह इस मामले में सिर्फ पर्सनल गारंटर ही थे. डॉ सुभाष चंद्रा ने संसद में 2016 में अपनी संपत्ति 39.08 करोड़ रुपये बताई थी. ऐसे में कोई बैंक 2017 में उनकी संपत्ति 45888 करोड़ रुपये कैसे दर्ज कर सकता है? उनका यह भी कहना है कि वर्ष 2024 में 25 करोड़ रुपये के एक घर सहित उनकी संपत्ति 31.79 करोड़ रुपये थी और इसी के हिसाब से रीपेमेंट प्लान दिया गया कि वह 6.5 करोड़ रुपये चुका सकते हैं.

क्यों हमलावर हैं मुकेश अंबानी पर

सुभाष चंद्रा ने मीडिया रिपोर्ट्स पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि मुकेश अंबानी के नेटवर्क (Network18) ने उनके मामले में भ्रम फैलाया और गलत बातें प्रसारित कीं. NCLT लोन सेटलमेंट पर Essel Group चेयरमैन डॉ सुभाष चंद्रा का कहना है कि 22000 करोड़ के पर्सनल लोन की बात गलत है. इस बारे में नेटवर्क 18 और CNBC ने गलत अफवाह फैलाई. इसको लेकर सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाले नेटवर्क 18 और CNBC पर भ्रम फैलाया और गलत बातें प्रसारित करने की बात कही है.

मुकेश अंबानी को फोन करने का दावा

डॉ. सुभाष चंद्रा का कहना है कि नेटवर्क 18 और CNBC द्वारा गलत अफवाह फैलाने पर उन्होंने गुरुवार (27 अगस्त, 2026) की शाम को मुकेश अंबानी को फोन किया, लेकिन उनका फोन नहीं मिला और बात नहीं हो पाई. इसके बाद शुक्रवार सुबह उन्हें एक चिट्ठी भी लिखी. उन्होंने आरोप लगाया कि मुकेश अंबानी के लोगों ने 2019 की शुरुआत जी के ज्यादातर शेयर खरीदने की ‘साजिश’ रची. यह गंभीर आरोप भी लगाया कि मुकेश अंबानी की सैक़ड़ों बेनामी कंपनियां हैं. इसके बाद सुभाष चंद्रा ने कहा कि वह मुकेश अंबानी से मिले और कहा कि वह जी़ खरीद लो, क्योंकि मुझे तो बेचना है और अपना कर्च चुकाना है. मुकेश अंबानी ने यह भी कहा कि सुभाष जी आप क्यों बैंकों के भारी भरकम कर्ज चुका रहे हैं. ऐसा कोई नहीं करता है. इस सलाह के बाद सुभाष चंद्रा का दावा है कि वह पास आ गए.

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