Tipu Sultan Photo Controversy: महाराष्ट्र के मालेगांव में महानगरपालिका के उपमहापौर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. तस्वीर को लेकर बीजेपी ने फौजदारी का मामला दर्ज करने की मांग की है, जबकि उपमहापौर शान-ए-हिंद का कहना है कि टीपू सुल्तान ने देश के लिए बलिदान दिया था, इसलिए उनकी तस्वीर लगाई गई है.
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मालेगांव महानगरपालिका में इस समय इस्लाम पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के समर्थन से सत्ता चल रही है. ऐसे में ये समझना जरूरी है कि महानगरपालिका का मौजूदा राजनीतिक गणित क्या है और टीपू सुल्तान की तस्वीर का विवाद आखिर शुरू कहां से हुआ.
मालेगांव महानगरपालिका का राजनीतिक गणित
मालेगांव महानगरपालिका में कुल 84 निर्वाचित पार्षद हैं. यहां देखें पार्टीवार स्थिति :-
| क्रमांक | पार्टी | पार्षदों की संख्या |
| 1. | इस्लाम पार्टी | 35 पार्षद |
| 2. | AIMIM | 21 पार्षद |
| 3. | शिवसेना | 18 पार्षद |
| 4. | समाजवादी पार्टी | 5 पार्षद |
| 5. | कांग्रेस | 3 पार्षद |
| 6. | भाजपा | 2 पार्षद |
कौन हैं महापौर?
महापौर पद पर शेख नसरीन बानो खालिद काबिज हैं, जबकि शान-ए-हिंद निहाल अहमद उपमहापौर हैं. इस्लाम पार्टी के 35, समाजवादी पार्टी के 5 और कांग्रेस के 3 पार्षदों को मिलाकर कुल 43 पार्षदों का समर्थन सत्ता पक्ष के पास है. इसी समर्थन के आधार पर शेख नसरीन बानो खालिद महापौर चुनी गई थीं. महापौर चुनाव में उन्हें 43 वोट मिले थे, जबकि शिवसेना की लता घोडके को 18 वोट मिले थे. उपमहापौर पद पर भी शान-ए-हिंद को 43 वोट मिले थे. बीजेपी और AIMIM ने उस चुनाव में तटस्थ रुख अपनाया था. यानी राजनीतिक तौर पर मालेगांव महानगरपालिका में इस्लाम पार्टी और समाजवादी पार्टी सत्ता में हैं, जबकि कांग्रेस उन्हें समर्थन दे रही है.
टीपू सुल्तान की तस्वीर पर विवाद क्या है?
टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर विवाद पहली बार फरवरी 2026 में सामने आया था. उस समय उपमहापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने का विरोध भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने किया था. विरोध करने वालों का तर्क था कि महानगरपालिका जैसे सरकारी कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाना उचित नहीं है. भाजपा और हिंदुत्ववादी संगठनों ने आरोप लगाया कि इस तरह के कदम से मालेगांव जैसे संवेदनशील शहर में राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है. विरोध के बाद तस्वीर हटाए जाने की बात भी सामने आई थी और मामला कुछ समय के लिए शांत हो गया था.
उपमहापौर ने क्यों लगाई तस्वीर?
उपमहापौर शान-ए-हिंद ने तस्वीर लगाने का बचाव करते हुए कहा कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और देश के लिए बलिदान दिया था. उनका कहना है कि इसी वजह से उनके कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई गई है. अब कार्यालय के नवीनीकरण के बाद 25-26 अगस्त 2026 को टीपू सुल्तान की तस्वीर एक बार फिर उपमहापौर के कार्यालय में दिखाई दी. खास बात यह है कि कार्यालय में टीपू सुल्तान के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर समेत अन्य महापुरुषों की तस्वीरें भी लगाई गई हैं.
टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने के बाद बीजेपी ने शुरू किया विरोध
तस्वीर दोबारा सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने फिर इसका विरोध शुरू कर दिया है. बीजेपी ने फौजदारी का मामला दर्ज करने की मांग की है. भाजपा जिला अध्यक्ष निलेश कचवे सहित पार्टी के पदाधिकारियों ने अपर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर उपमहापौर के खिलाफ फौजदारी मामला दर्ज करने की मांग की है. इसको लेकर बीजेपी का आरोप है कि उपमहापौर बार-बार इस तरह के कदम उठाकर शहर में जातीय तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.
बीजेपी नेताओं ने किया दावा
बीजेपी नेताओं ने यह भी दावा किया है कि महाराष्ट्र सरकार के परिपत्र के अनुसार महानगरपालिका कार्यालय में 29 महापुरुषों की तस्वीरें लगाई जा सकती हैं. बीजेपी का आरोप है कि टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाना एक षडयंत्र का हिस्सा है. इसके अलावा, बीजेपी ने चेतावनी दी है कि दोबारा ऐसा किया गया तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता महानगरपालिका कार्यालय पहुंचकर आंदोलन करेंगे और कार्यालय को ताला लगाने की चेतावनी भी दी है.

