UP Assembly Election 2027: अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की तैयारी कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, 403 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस 115 से 120 सीटों पर चुनाव लड़ने की उम्मीद कर रही है. यूपी में वापसी करने और 2024 के लोकसभा चुनावों की सफलता को दोहराने की कोशिश में जुटी कांग्रेस संगठन सृजन पहल के तहत संगठन को मजबूत कर रही है और सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है. पार्टी को भरोसा है कि गठबंधन में उसे पहले की तुलना में अधिक सीटें मिल सकती हैं.
इस घटनाक्रम से जुड़े पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी से 115 से 120 सीटें मांगने की योजना बना रही है. पार्टी का मानना है कि यह सम्मानजनक सीट बंटवारा होगा, खासकर जिस तरह उसने दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को फिर से अपने पक्ष में लाने में सफलता हासिल की है.
2017 में 114 सीटों पर चुनाव लड़ी थी कांग्रेस पार्टी
पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था और उस समय अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए भी कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था.
2017 में समाजवादी पार्टी ने 311 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह सिर्फ 47 सीटों पर सिमट गई थी. वहीं, भाजपा ने 384 सीटों पर चुनाव लड़कर 312 सीटें जीती थीं और स्पष्ट बहुमत हासिल किया था.
सूत्र ने यह भी बताया कि 2017 में समाजवादी पार्टी के सहयोगी दलों में ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी शामिल थी, जिसने आठ सीटों पर चुनाव लड़कर चार सीटें जीती थीं.
सपा-कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव बीजेपी को पहुंचाया नुकसान
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने INDIA ब्लॉक के हिस्से के रूप में उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया था.
पार्टी के सूत्र के मुताबिक, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मिलकर राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 43 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा की सीटों की संख्या 2019 के मुकाबले 29 कम होकर 33 रह गई.
2024 में समाजवादी पार्टी ने 62 सीटों पर चुनाव लड़कर 37 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़कर छह सीटों पर जीत दर्ज की.
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को श्रेय
पार्टी के सूत्र ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में INDIA ब्लॉक को बड़ी सफलता मिलने का मुख्य कारण राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा रही, जिसके दौरान उन्होंने संविधान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था.
सूत्र ने यह भी कहा कि पेपर लीक के मुद्दे पर भाजपा को लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है और विपक्ष भी इस मुद्दे के साथ-साथ पुलिस की कथित ज्यादतियों को प्रमुखता से उठा रहा है. कांग्रेस को उम्मीद है कि इन मुद्दों के जरिए वह भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल होगी.
पार्टी के अंदरूनी सूत्र ने बताया कि दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत जल्द शुरू होने की उम्मीद है. कांग्रेस 115 से 120 सीटों पर चुनाव लड़ने की उम्मीद कर रही है. पार्टी का मानना है कि छात्रों सहित विभिन्न मुद्दों पर राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के आक्रामक रुख के कारण उसे अधिक सीटें मिलनी चाहिए.
राम मंदिर में चोरी के मामले को उठाने की तैयारी
दोनों पार्टियां चुनाव प्रचार के दौरान अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावे के गबन के मुद्दे को भी उठाने की तैयारी कर रही हैं. सूत्र के मुताबिक, दोनों दलों का मानना है कि यह मुद्दा आम मतदाताओं से जुड़ सकता है और भाजपा पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया जा सकता है.
सूत्र ने यह भी दावा किया कि दलित और अल्पसंख्यक वर्ग कांग्रेस को समाजवादी पार्टी की तुलना में विपक्ष की मुख्य ताकत मानते हैं. उनके अनुसार, समाजवादी पार्टी का मुख्य जनाधार ओबीसी और कुछ हद तक सवर्ण मतदाताओं में है.
दोनों पार्टियां भाजपा से सवर्ण और पिछड़े वर्ग के साथ-साथ अन्य सामाजिक समूहों के वोटों को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर भी काम कर रही हैं. ऐसे में सीट बंटवारे को लेकर बातचीत में दोनों दलों की संबंधित क्षेत्रों में चुनावी ताकत को प्रमुख आधार बनाया जाएगा.
यूपी में सत्ता विरोधी लहर का दावा
पार्टी के सूत्र ने यह भी कहा कि राज्य में लोग योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल महसूस करने लगे हैं, क्योंकि सरकार लगातार दो कार्यकाल पूरे कर चुकी है.
हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकी थीं. समाजवादी पार्टी ने अपनी स्थिति में सुधार करते हुए 111 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा की सीटों की संख्या 2017 की 312 सीटों से घटकर 255 रह गई थी.
कांग्रेस ने 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान के साथ अकेले चुनाव लड़ा था, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं दिखा. पार्टी ने 399 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल दो सीटें जीती थीं. इसीलिए, कांग्रेस अब अपनी पिछली गलतियों से सबक लेते हुए समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के जरिए उत्तर प्रदेश में वापसी की कोशिश कर रही है.
उम्मीदवारों को ज्यादा चुनावी फंड नहीं देने की योजना
इस बीच, पार्टी के एक अन्य सूत्र ने बताया कि कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को ज्यादा चुनावी फंड नहीं देने की योजना बना रही है. पार्टी की ओर से उम्मीदवारों को केवल चुनाव प्रचार सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी.
सूत्र के मुताबिक, पार्टी टिकट के लिए पात्रता मानदंड के तौर पर उम्मीदवारों से उनके बैंक खाते में 20 लाख रुपये की राशि होने का प्रमाण मांगने की योजना बना रही है. इसके अलावा उम्मीदवारों से 2 लाख रुपये पार्टी फंड के रूप में साझा करने को कहा जाएगा.
सूत्र ने बताया कि पिछली बार विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों को 25 लाख रुपये से लेकर 75 लाख रुपये तक की राशि चुनाव लड़ने के लिए दी थी. इस बार पार्टी की ओर से केवल प्रचार सामग्री उपलब्ध कराने का फैसला कांग्रेस की चुनावी रणनीति और फंडिंग नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

