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Wayanad Landslide Video: टनल से निकला मलबे का ऐसा सैलाब, जिसने देखा कांप गई रूह; 2 की मौत, कई लापता! कैसे हुआ यह हादसा?

Wayanad Landslide Video: टनल से निकला मलबे का ऐसा सैलाब, जिसने देखा कांप गई रूह; 2 की मौत, कई लापता! कैसे हुआ यह हादसा?

In Khabar 1 week ago

केरल के वायनाड में एक बार फिर कुदरत का कहर बरपा है. मंगलवार की सुबह भारी बारिश की वजह से यहां एक दर्दनाक भूस्खलन (landslide) हुआ, जिसमें दो लोगों की जान चली गई और आठ लोग घायल हो गए हैं.

मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है. यह हादसा कल्लाडी में मीनाक्षी ब्रिज के पास हुआ.

कैसे हुआ यह हादसा?

दरअसल, इस इलाके में 'मलप्पुरम-वायनाड टनल प्रोजेक्ट' का काम चल रहा है. सुरंग की खुदाई से निकली मिट्टी को बाहर ही ढेर कर के रखा गया था. लगातार हो रही भारी बारिश के कारण यह मिट्टी अचानक खिसक गई, जिससे बड़े-बड़े पेड़ उखड़ गए और सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स भी बह गए.

इस हादसे का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सामने आया है. फुटेज में दिख रहा है कि 7 जुलाई की सुबह करीब 11:15 बजे टनल से मलबे का एक जोरदार सैलाब निकला और उसने वहां खड़े एक बड़े टैंकर को तिनके की तरह बहा दिया. इस भयानक मंजर की चपेट में आने से दो लोग मलबे में फंस गए.

राहत और बचाव कार्य जारी

फिलहाल पुलिस और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें मौके पर मुस्तैदी से रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। मलबे को हटाने के लिए जेसीबी (JCB) मशीनों की मदद ली जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, लगातार हो रही बारिश को देखते हुए सोमवार से ही सुरंग का काम रोक दिया गया था, लेकिन फिर भी यह हादसा हो गया.

क्या है मलप्पुरम-वायनाड टनल प्रोजेक्ट?

इस प्रोजेक्ट का मकसद मलप्पुरम और वायनाड को एक सुरंग के जरिए आपस में जोड़ना है. यह सुरंग करीब 8.17 किलोमीटर लंबी है और इसे बनाने में लगभग ₹2,100 से ₹2,200 करोड़ की लागत आने का अनुमान है.

याद दिला दें कि यह कोई पहली घटना नहीं है; ठीक दो साल पहले वायनाड में एक के बाद एक तीन विनाशकारी भूस्खलन हुए थे, जिनमें 400 से ज्यादा बेकसूर लोगों की जान चली गई थी.

वायनाड में आखिर क्यों आते हैं इतने भूस्खलन?

भौगोलिक दृष्टि से देखें तो वायनाड केरल के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है। यह केरल का एकमात्र पठारी क्षेत्र है, जो उबड़-खाबड़ ढलानों, चट्टानों और घने जंगलों से घिरा है.

वायनाड के बार-बार दरकने के पीछे मुख्य वजह

संवेदनशील इलाका: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल का 43% हिस्सा भूस्खलन के प्रति बेहद संवेदनशील है. वायनाड का तो 51% हिस्सा पहाड़ी ढलानों से ढका है, जिससे यहां खतरा हमेशा बना रहता है.

वायनाड का पठार पश्चिमी घाट में 700 से 2,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. मानसून के दौरान जब अरब सागर से उठने वाली मानसूनी हवाएं पश्चिमी घाट से टकराती हैं, तो इस पूरे इलाके में मूसलाधार बारिश होती है.

वायनाड से काबिनी नदी बहती है, और इसकी सहायक नदी 'मानंतवाड़ी' थोंडरमुडी चोटी से निकलती है. जब भी भूस्खलन होता है, तो इस नदी में अचानक बाढ़ आ जाती है, जिससे आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचती है.

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: In Khabar