Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story

दूसरों को देखकर खुद को उबासी क्यों आने लगती है? थकान या बोरियत नहीं, समझें इसके पीछे का मैकेनिज्म

India News 1 month ago

Contagious yawning: अक्सर आपने देखा होगा कि, जब भी हम दूसरों को उबासी लेते देखते हैं तो खुद पर भी दुनियाभर की नींद सवार हो जाती है. मतलब खुद को भी उबासी आने लगती है. फिर चाहें वह घर हो, ऑफिस हो या फिर मीटिंग ही क्यों न हो.

शुरुआत जम्हाई के साथ होती है, फिर धीरे-धीरे आंखें भर आती हैं. कई बार तो ऐसा भी होता है कि एक व्यक्ति की उबासी पूरे कमरे में 'फैल' जाती है और देखते ही देखते सब लोग जम्हाई लेने लगते हैं. लेकिन, आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा होता क्यों है? क्यों दूसरे को देखकर खुद को भी उबासी आने लगती है? क्या उबासी आना थकान या बोरियत का संकेत है? आइए जानते हैं इसके पीछे का मैकेनिज्म-

दूसरे को देखकर क्यों आती है उबासी

मेडिकल न्यूज टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरों को देखकर खुद को उबासी आना सिर्फ थकान या बोरियत का संकेत नहीं है, बल्कि इसके पीछे दिमाग का एक खास मैकेनिज्म काम करता है. वैज्ञानिक भाषा में इसे 'कन्टेजियस यॉनिंग' कहा जाता है, जो हमारे ब्रेन, इमोशन्स और सोशल कनेक्शन से गहराई से जुड़ा होता है.

ब्रेन का 'कॉपी कैट' सिस्टम

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे ब्रेन में मौजूद मिरर न्यूरॉन्स हमें दूसरों की हरकतों की नकल करने के लिए प्रेरित करते हैं. मतलब जब भी हम किसी को उबासी लेते देखते हैं, तो ये न्यूरॉन्स एक्टिव हो जाते हैं और हमें भी वही करने का संकेत देने लगते हैं. यही वजह है कि किसी दूसरे को उबासी लेते देख खुद को भी जम्हाई आने लगती है.

जुड़ाव का भी उबासी से कनेक्शन

जम्हाई से जुड़ी रोचक बात यह है कि हम हर किसी को देखकर उबासी नहीं लेते हैं. उबासी के लिए ब्रेन तब ज्यादा एक्टिव होता जब कोई य लोगों से हमारा इमोशनल कनेक्शन मजबूत होता है, जैसे दोस्त या परिवार, उनकी जम्हाई हमें ज्यादा प्रभावित करती है. यह हमारे दिमाग की सहानुभूति दिखाने का एक तरीका भी है.

सिर्फ थकान नहीं, ब्रेन का कूलिंग मैकेनिज्म

उबासी सिर्फ थकान नहीं, बल्कि दिमाग को ठंडा रखने का भी तरीका है. दरअसल, जब हम गहरी सांस लेते हैं, तो ठंडी हवा अंदर जाती है और ब्लड सर्कुलेशन के जरिए ब्रेन का तापमान संतुलित रहता है. जब हम जम्हाई लेते हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और दिमाग तक ब्लड फ्लो तेज हो जाता है. इससे न्यूरॉन्स एक्टिव होते हैं और हमारी सतर्कता बढ़ती है.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: India News