Dailyhunt

Ustad Bismillah Khan: फटी लुंगी पहनने पर शिष्य ने टोका तो बिस्मिल्लाह खान ने दिया जीवन का सबक, शहनाई को दिलाई पहचान

India News 2 weeks ago

Ustad Bismillah Khan: भारत की सरजमीं ने दुनिया को बेहतरीन कलाकारों से नवाजा है. ऐसा ही एक नाम है उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का. बिस्मिल्लाह खान का नाम सुनते ही कानों में शहनाई की सुरीली धुन गूंजने लगती है.

बहुत कम लोग उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का पूरा नाम जानते हैं. उनका पूरा नाम कमरुद्दीन बिस्मिल्लाह खान था. उनका जन्म 21 मार्च 1916 को बिहार के भोजपुर ज़िले के डुमरांव में हुआ था. लेकिन, उनका जीवन बनारस की टेढ़ी-मेढ़ी गलियों में बीता. गंगा-जमुनी तहज़ीब के साक्षात प्रतीक बिस्मिल्लाह खान शहनाई के ऐसे उस्ताद थे कि उनकी हर सांस में संगीत के सुर घुले हुए लगते थे.

बिस्मिल्लाह खान शहनाई बजाने को ईश्वर की आराधना का ही एक रूप मानते थे. इस वाद्य यंत्र पर अपनी महारत के लिए उन्हें कई नागरिक सम्मान मिले. इनमें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से लेकर देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न भी शामिल है.

बिस्मिल्लाह खान के बारे में कुछ दिलचस्प किस्से

बिस्मिल्लाह खान जितने बड़े कलाकार थे, उतने ही जमीन से जुड़े और यथार्थवादी भी थे. उनकी सादगी भरी आडंबरहीन जीवनशैली से जुड़े कई किस्से आज भी बनारस की गलियों में सुनने को मिलते हैं. ऐसा ही एक किस्सा तब का है जब उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिल चुका था. उस समय बिस्मिल्लाह खान एक फटी हुई लुंगी पहनकर ही एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देने लगे. जब उनकी एक शिष्या ने इस बात पर उन्हें प्यार से टोका तो उन्हें एक ऐसी सीख एक गुरु मंत्र मिला, जिसमें किसी की भी जिंदगी बदलने की ताकत है.

भारत रत्न और फटी लुंगी

साल 2001 में भारत सरकार ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया. यह वह दौर था जब उनकी कला की उत्कृष्टता को न केवल पूरे भारत में बल्कि पूरी दुनिया में एक मिसाल के तौर पर देखा जाता था. उसी दौरान, एक टीवी चैनल उनकी कला पर इंटरव्यू लेने के लिए उनके घर पहुंचा. बिस्मिल्लाह खान ने उसी फटी हुई लुंगी को पहने हुए ही इंटरव्यू देना शुरू कर दिया, जिसे पहनकर वे उस समय बैठे हुए थे. यह देखकर, उनके शिष्य ने धीरे से बीच में टोकते हुए पूछा उस्ताद आप यह क्या कर रहे हैं? आपको 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया है फिर आप फटी हुई लुंगी पहनकर इंटरव्यू क्यों दे रहे हैं? इससे लोगों को क्या संदेश मिलेगा?

अपने शिष्य के सवाल का जवाब देते हुए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने बड़े प्यार से समझाया अरे, पगली! मुझे 'भारत रत्न' तो शहनाई बजाने के लिए मिला है. फटी हुई लुंगी का उससे क्या लेना-देना? खैर, जब तुम इतना ज़ोर दे रही हो, तो मैं अपनी लुंगी बदल लेता हूं. लेकिन हमेशा भगवान से यही प्रार्थना करना कि वे तुम्हें केवल सच्चे सुर ही दें कभी कोई बेसुरा सुर न दें. क्योंकि अगर भगवान ने तुम्हें एक भी गलत सुर दे दिया, तो तुम्हारी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी. और रही बात लुंगी की? तो उसकी क्या चिंता करना? आज यह फटी हुई है, तो कल इसे सिला भी जा सकता है.

जीवन की बड़ी सीख

बिस्मिल्लाह खान ने अपने शिष्य को जो सीख दी, उससे यह पता चलता है कि किसी भी इंसान की असली कीमत उसके काम से आंकी जाती है न कि उसके पहनावे से. कोई इंसान बाहर से खुद को कितना भी सजा-संवार ले लेकिन अगर वह अंदर से बेतरतीब और अपवित्र है, तो उसे मिलने वाले सम्मान की कोई सच्ची कीमत नहीं होती. बिस्मिल्लाह खान से जुड़े ऐसे कई दिलचस्प किस्से हैं.

शहनाई को नई ऊंचाइयों पर ले जाना

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान से पहले, शहनाई ज़्यादातर मंदिरों, शादियों और दूसरे शुभ मौकों पर ही सुनाई देती थी. भारतीय संस्कृति में इसकी गहरी जड़ों के बावजूद इसे सितार, सरोद और बांसुरी जैसे शास्त्रीय वाद्ययंत्रों जैसी औपचारिक पहचान और तकनीकी बारीकियां हासिल नहीं थीं. इसे एक ऐसा वाद्ययंत्र माना जाता था जो सिर्फ़ कामचलाऊ हो, न कि ऐसा जो किसी बड़े संगीत समारोह के मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन कर सके. लेकिन बिस्मिल्लाह खान ने सब कुछ बदल दिया. सिर्फ़ शहनाई बजाकर ही नहीं, बल्कि इसे शास्त्रीय संगीत की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बनाकर.

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने शहनाई की तकनीकी क्षमताओं को निखारने से कहीं ज़्यादा काम किया. उन्होंने इसे दूसरे वाद्ययंत्रों के साथ मिलकर बजाने के लिए भी ज़्यादा अनुकूल बनाया; वे अक्सर तबला, तानपुरा और हारमोनियम वादकों के साथ मिलकर ऐसी प्रस्तुतियां देते थे, जिनसे संगीत समारोहों में एक समृद्ध और यादगार अनुभव मिलता था. उन्होंने पूरे भारत में कई मशहूर जगहों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं. जिनमें वाराणसी का संकट मोचन संगीत समारोह, ग्वालियर का तानसेन संगीत समारोह और पुणे का सवाई गंधर्व समारोह शामिल हैं. इस तरह उन्होंने शहनाई को भारतीय शास्त्रीय संगीत के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाया.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: India News