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CIBIL में 'Written Off' का क्या मतलब है? कैसे यह आपके सिबिल स्कोर पर डालता है असर, जानें सुधार के तरीके

CIBIL में 'Written Off' का क्या मतलब है? कैसे यह आपके सिबिल स्कोर पर डालता है असर, जानें सुधार के तरीके

India TV Paisa 1 week ago

पने पूरी ईमानदारी से लोन लिया, लेकिन किसी खास वजह से कुछ EMI समय पर नहीं चुका पाए। बाद में जब नया लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए CIBIL रिपोर्ट चेक करते हैं, तो Written Off स्टेटस देखकर हैरानी होती है।

क्या अब EMI देने की जरूरत नहीं? क्या लोन पूरी तरह खत्म हो गया? और क्या इससे आगे लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा? सच्चाई यह है कि CIBIL में Written Off का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपका कर्ज माफ हो गया या खत्म हो गया। इसका सीधा मतलब है कि बैंक या लेंडर (उधार देने वाला संस्थान) ने लंबे समय (आमतौर पर 180 दिन या उससे ज्यादा) तक भुगतान न होने के कारण उस लोन को अपने खातों में घाटे के रूप में दर्ज कर लिया है। आइए, यहां हम यह समझ लेते हैं कि CIBIL में Written Off क्या होता है, आपके क्रेडिट स्कोर पर इसका क्या असर पड़ता है, और इसे सुधारने के क्या व्यावहारिक तरीके हैं।

CIBIL में 'Written Off' का मतलब समझिए

herofincorp के मुताबिक, जब कोई उधारकर्ता लोन या क्रेडिट कार्ड की किस्तें लगातार नहीं भर पाता, तो लेंडर कई रिमाइंडर और रिकवरी प्रयासों के बाद उस अकाउंट को Written Off घोषित कर देता है। यह बैंक की अकाउंटिंग प्रक्रिया है-वे उस राशि को वसूली की उम्मीद कम होने पर नुकसान के रूप में लिख देते हैं। इसके बाद यह जानकारी CIBIL (क्रेडिट ब्यूरो) को रिपोर्ट कर दी जाती है, और आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में Written Off स्टेटस दिखने लगता है। गौर करने वाली बात यहां यह है कि यह स्टेटस यह नहीं बताता कि कर्ज माफ हो गया है। आप कानूनी रूप से अभी भी पूरी बकाया राशि के लिए जिम्मेदार रहते हैं। लेंडर या रिकवरी एजेंसी भविष्य में भी वसूली के प्रयास कर सकती है।

Written Off को Settled (आंशिक भुगतान पर समझौता) से अलग समझें। Written Off में बैंक ने वसूली छोड़ दी, जबकि Settled में आपने कम राशि देकर मामला निपटा लिया होता है। दोनों ही नकारात्मक हैं, लेकिन पूर्ण भुगतान के बाद स्टेटस को Closed या Written Off Paid में बदला जा सकता है।

Written Off का CIBIL स्कोर पर असर

Written Off एक गंभीर निगेटिव मार्क है, क्योंकि यह लंबे समय तक भुगतान न करने को दर्शाता है। इसके कई गंभीर प्रभाव पड़ते हैं। आपका CIBIL स्कोर काफी गिर जाता है (कई बार 100 पॉइंट्स या उससे ज्यादा)।
नए लोन, होम लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड मिलने में दिक्कत होती है-बैंक या तो मना कर देते हैं या बहुत ज्यादा ब्याज दर लगाते हैं। भविष्य में क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने या अन्य वित्तीय सुविधाओं में समस्या आ सकती है। यह स्टेटस डिफॉल्ट की तारीख से आमतौर पर 7 साल तक आपकी रिपोर्ट में रह सकता है, भले ही आप बाद में भुगतान कर दें। हालांकि, सही समय पर कदम उठाकर आप इस स्टेटस को अपडेट करवा सकते हैं और अपना क्रेडिट प्रोफाइल धीरे-धीरे सुधार सकते हैं।

CIBIL से Written Off स्टेटस कैसे सुधारें?

स्टेप 1: CIBIL की आधिकारिक वेबसाइट (cibil.com) से अपनी रिपोर्ट डाउनलोड करें। ध्यान से देखें कि कौन सा अकाउंट Written Off है, बकाया राशि कितनी है और डिफॉल्ट की तारीख क्या है।
स्टेप 2: लेंडर (बैंक या NBFC) से बात करें। बकाया राशि की सही जानकारी लें और भुगतान के विकल्प पूछें। अगर संभव हो तो पूरी राशि चुकाने की कोशिश करें- यह आंशिक सेटलमेंट से बेहतर है।
स्टेप 3: पूरी राशि चुकाने के बाद लेंडर से लिखित रूप में No Dues Certificate (NOC) मांगें। उनसे अनुरोध करें कि अकाउंट का स्टेटस Closed या Written Off (Paid) में अपडेट किया जाए और यह जानकारी CIBIL को भेजी जाए।
स्टेप 4: अगर अपडेट न हो तो CIBIL में शिकायत दर्ज करें। CIBIL पोर्टल पर 'Grievance' या 'Dispute' सेक्शन में शिकायत दर्ज करें। NOC और भुगतान के प्रमाण संलग्न करें।
स्टेप 5: अपडेट होने में 30 से 45 दिन या उससे ज्यादा समय लग सकता है। शिकायत का स्टेटस चेक करते रहें और जरूरत पड़ने पर लेंडर से दोबारा संपर्क करें।

ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें

  • स्टेटस अपडेट करने का अधिकार सिर्फ लेंडर के पास है- CIBIL खुद नहीं बदल सकता।
  • आंशिक सेटलमेंट करने पर स्टेटस Settled हो सकता है, जो कि निगेटिव रहता है। इसलिए पूरी राशि चुकाना बेहतर है।
  • भुगतान के बाद हमेशा लिखित प्रमाण (NOC) रखें।
  • सुधार होने के बाद भी पुराना रिकॉर्ड 7 साल तक दिख सकता है, लेकिन स्कोर धीरे-धीरे सुधरने लगेगा।
  • भविष्य में EMI हमेशा समय पर भरें, अपनी आय के अनुसार ही लोन लें और नियमित रूप से CIBIL रिपोर्ट चेक करते रहें।
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