नासा के आर्टेमिस-II मिशन पर सवार अंतरिक्ष यात्रियों ने एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना का अनुभव किया है, जिसे पृथ्वी से देख पाना संभव नहीं है। जब उनका ओरायन अंतरिक्ष यान चंद्रमा के पीछे पहुंचा, तो चंद्रमा ने पूरी तरह सूर्य को ढक लिया और अंतरिक्ष गहरे अंधकार में डूब गया।
इस अनोखे क्षण के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को सूर्य की बाहरी परत, जिसे सौर कोरोना कहा जाता है, साफ दिखाई दी। यह चमकदार परत आमतौर पर सूर्य की तेज रोशनी के कारण दिखाई नहीं देती। कोरोना की पतली, धुंधली किरणें अंतरिक्ष में फैलती नजर आईं, जो वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
वैज्ञानिकों की खास दिलचस्पी इस क्षेत्र में इसलिए है क्योंकि यह सूर्य की सतह से भी अधिक गर्म होता है, जो अब तक एक रहस्य बना हुआ है। अंतरिक्ष यात्री विशेष कैमरों और सुरक्षा उपकरणों की मदद से इस दृश्य की विस्तृत तस्वीरें और आंकड़े एकत्र कर रहे हैं।
यह दुर्लभ ग्रहण केवल देखने में सुंदर ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे वैज्ञानिक सौर हवाओं और सौर तूफानों को बेहतर समझने की उम्मीद कर रहे हैं, जो पृथ्वी पर उपग्रह, संचार प्रणाली और बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं।
चंद्रमा के पीछे से यह दृश्य और भी खास बन गया, क्योंकि उसकी सतह सामान्य से अधिक अंधेरी दिखी, लेकिन पूरी तरह काली नहीं थी। उसके किनारों पर कोरोना की हल्की चमक दिखाई दी, जिससे चंद्रमा के दूरस्थ हिस्सों को देखना आसान हो गया।
यह ग्रहण लगभग एक घंटे तक चला, जो पृथ्वी पर दिखने वाले ग्रहणों से काफी लंबा है। यह दुर्लभ घटना मंगलवार सुबह 7:02 बजे (भारतीय समय) तक जारी रहने की उम्मीद है।

