शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने 6 अप्रैल को अपने अमृतसर मुख्यालय में सभी सिख संगठनों की बैठक आयोजित करने की घोषणा की है। बैठक में पंजाब सरकार द्वारा धर्मग्रंथ अपमान के लिए दंड कानून में संशोधन के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने बैठक के बाद इसे "अत्यंत संवेदनशील" मुद्दा बताया और जोर दिया कि इस पर 'पंथिक' दृष्टिकोण से एकजुट राय बनाना महत्वपूर्ण है। बैठक में निहंग सिंह समूह, दमदमी टकसाल, सिख संस्थान, विद्वान, न्यायाधीश, वकील, सिख मिशनरी कॉलेज, सिंह सभाएं, सिख महासंघ और विभिन्न संप्रदायों के नेता शामिल होंगे।
एसजीपीसी का उद्देश्य इस बैठक के माध्यम से प्रस्तावित कानून में बदलाव पर एक सामूहिक राय तैयार करना और भविष्य की कार्रवाई के लिए सरकार को मार्गदर्शन प्रदान करना है।
पंजाब सरकार गुरु ग्रंथ साहिब और अन्य धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने वालों को कठोर दंड देने के लिए कानून लाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 13 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की है, जिसमें 2008 के अधिनियम में संशोधन कर सख्त दंड की व्यवस्था की जाएगी। प्रस्तावित कानून में भारी जुर्माना, संपत्ति जब्ती और डिजिटल माध्यम से किए गए अपराधों को भी शामिल करने की संभावना है।
एसजीपीसी अध्यक्ष धामी ने स्पष्ट किया कि बैठक कानून को रोकने के लिए नहीं है, बल्कि इसमें सभी हितधारकों के विचार एकत्र कर सरकार को सुझाव देने का काम होगा। यह कदम उन कई घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें पंजाब में सिख धर्मग्रंथ और पवित्र स्थलों का अपमान किया गया। 2015 और 2021 में बरगाड़ी, मिश्रीवाला और अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में इस तरह की घटनाएं सामने आई थीं, जिनके कारण व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

