Dailyhunt
शिक्षा का अधिकार विशेष स्कूल चुनने का अधिकार नहीं देता: दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला

शिक्षा का अधिकार विशेष स्कूल चुनने का अधिकार नहीं देता: दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी बच्चे का शिक्षा का अधिकार (RTE) उसे किसी विशेष स्कूल चुनने का अधिकार नहीं देता। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सुनाया।

न्यायालय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) सामाजिक समावेशन और स्कूलों को जाति, समुदाय या आर्थिक वर्ग की दीवारों से परे एक सामान्य स्थान बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है। यह कानून सभी बच्चों को समान अवसर देने के लिए लाभकारी है।

हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का यह अधिकार विशेष रूप से किसी स्कूल का चयन करने में नहीं बदल सकता। इस निर्णय का संदर्भ एक माता के अपील से जुड़ा है, जिन्होंने अपने बच्चे को 2024-2025 शैक्षणिक सत्र में EWS श्रेणी के तहत किसी निजी स्कूल की कक्षा 2 में प्रवेश दिलाने का प्रयास किया था।

एकल न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि किसी वर्ष की कक्षा 1 में EWS सीटें भरती नहीं हैं, तो उन्हें अगले वर्ष उसी कक्षा के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे अवसर किसी भी EWS उम्मीदवार के लिए खुले रहेंगे, जिसमें अपीलकर्ता का वार्ड भी शामिल है, यदि वे आवेदन करना चुनते हैं।

न्यायालय ने यह निर्णय शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के व्यापक दृष्टिकोण में संतुलित माना, ताकि बच्चों को समान अवसर मिलें, लेकिन स्कूल चयन की स्वतंत्रता RTE के दायरे में नहीं आए।

इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि RTE अधिनियम का उद्देश्य केवल प्रवेश और शिक्षा सुनिश्चित करना है, न कि स्कूलों के चयन में अधिकार देना।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Indian Witness Hindi