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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार्य

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार्य

Indo Asian Times 13 mins ago
  • कृष्ण मोहन को सौंपी गई जिम्मेदारी

  • दान राशि की गणना में अनियमितता की जांच के बीच न्यास की बैठक में अहम फैसले, नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित

अयोध्या, 6 जुलाई।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को अयोध्या में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए। बैठक में दान राशि की गणना प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं, उसकी जांच, मीडिया में चल रही चर्चाओं, महामंत्री और एक ट्रस्टी के इस्तीफे तथा ट्रस्ट की भावी व्यवस्था पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। साथ ही, नए महामंत्री की नियुक्ति होने तक ट्रस्टी कृष्ण मोहन को महामंत्री के दायित्वों का निर्वहन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

इसके अलावा ट्रस्ट ने एक योग्य मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी तथा सुरेश हावड़े शामिल होंगे। समिति ट्रस्ट को उपयुक्त नामों की अनुशंसा करेगी।

छह वर्षों में ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख

ट्रस्ट ने कहा कि वर्ष 2020 में स्थापना के बाद छह वर्ष से भी कम समय में प्रभु श्रीरामलला के भव्य और अप्रतिम मंदिर का निर्माण पूरा किया गया। इसी अवधि में मुख्य मंदिर और परकोटे में निर्मित सभी मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण तथा श्रीराम यंत्र की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान वैदिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराए गए।

ट्रस्ट ने इस ऐतिहासिक कार्य में सहयोग देने वाले समस्त हिंदू समाज, श्रमिकों, अभियंताओं, शिल्पकारों, वास्तुविदों तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

दान राशि और खर्च का पूरा विवरण भी किया सार्वजनिक

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान के माध्यम से ट्रस्ट को कुल 3,246 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 2,150 करोड़ रुपये निर्माण एवं पूंजीगत कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं।

इसके अतिरिक्त स्थापना से लेकर 31 मार्च 2026 तक मंदिर में कुल 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ, जिसमें से 392 करोड़ रुपये संचालन व्यय पर खर्च किए गए। शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है। ट्रस्ट ने कहा कि समय-समय पर ये सभी वित्तीय जानकारियां मीडिया के समक्ष सार्वजनिक की जाती रही हैं।

अनियमितता पर जताई चिंता, एसआईटी जांच की जानकारी दी

ट्रस्ट ने स्वीकार किया कि चढ़ावे की राशि की गणना प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं से सभी न्यासी आहत और चिंतित हैं। ट्रस्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जैसे ही अधिकारियों को मामले की जानकारी मिली, उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया।

सरकार ने तत्काल उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष, व्यापक और तथ्यपरक जांच हो सके। ट्रस्ट का कहना है कि किसकी क्या भूमिका रही, किन लोगों की संलिप्तता है और किनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए, इसका निर्णय केवल जांच के आधार पर ही संभव है।

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में आठ लोगों के नाम

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में आठ लोगों के नाम सामने आए हैं। जिनके खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले, उनके विरुद्ध ट्रस्ट ने मुकदमा दर्ज कराया और गिरफ्तारियां भी हुईं।

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही एसआईटी केवल जांच ही नहीं करेगी, बल्कि भविष्य में ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत, सुरक्षित तथा पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक सुधारों की भी अनुशंसा करेगी।

गोपाल नगरकोटे का नाम भी हटाया गया

ट्रस्ट ने बताया कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों के साथ-साथ श्री गोपाल नगरकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटाने का भी निर्णय लिया गया है।

ट्रस्ट का कहना है कि जांच की पूरी वैधानिक प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही सत्य पूरी तरह सामने आएगा और उससे पहले किसी व्यक्ति पर दोषारोपण करना उचित नहीं होगा।

व्यवस्थागत सुधार पर रहेगा विशेष जोर

न्यास ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से मिली सीख के आधार पर प्रबंधन और संचालन प्रणाली की कमजोरियों को दूर किया जाएगा। एसआईटी की सिफारिशों के अतिरिक्त स्वतंत्र विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया जाएगा, ताकि मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था आदर्श, कुशल और पूरी तरह पारदर्शी बन सके तथा देशभर के धार्मिक संस्थानों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

'मंदिर और आस्था को बदनाम करने की कोशिश'

ट्रस्ट ने प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि कुछ लोग इस दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण का उपयोग श्रीरामलला मंदिर, श्रीराम जन्मभूमि और व्यापक हिंदू समाज की आस्था को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं। ट्रस्ट का कहना है कि आधारहीन आरोपों का उद्देश्य सत्य सामने लाना नहीं, बल्कि भ्रम फैलाना है।

दान की गई वस्तुओं का भी पूरा रिकॉर्ड होने का दावा

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि नकद दान के अलावा श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गई सभी वस्तुओं का भी विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाता है। अब तक 2,126 भेंट प्राप्त हुई हैं, जिनका विवरण तिथि सहित रजिस्टर में दर्ज है। इनका भौतिक सत्यापन प्रत्येक वर्ष एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा किया जाता है।

ट्रस्ट ने बताया कि काउंटर पर दी गई प्रत्येक भेंट की रसीद जारी की जाती है। यदि कोई श्रद्धालु अपनी भेंट के उपयोग या सत्यापन की जानकारी प्राप्त करना चाहता है, तो वह ट्रस्ट से समय लेकर अयोध्या आ सकता है और श्रीरामलला के दर्शन के साथ अपनी भेंट का सत्यापन भी कर सकता है।

ट्रस्ट ने यह भी बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गई चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल में गलवाकर छड़ें तैयार कराई गई हैं। उनका मूल विवरण, फोटो, वजन तथा टकसाल द्वारा जारी शुद्धता और कुल वजन के प्रमाण-पत्र भी सुरक्षित उपलब्ध हैं।

साक्ष्य हों तो जांच एजेंसियों को सौंपें

प्रेस विज्ञप्ति में ट्रस्ट ने अपील की कि यदि किसी व्यक्ति, संस्था या पत्रकार के पास मंदिर से जुड़े किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध अनियमितता के ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय एसआईटी अथवा संबंधित जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया जाए। ट्रस्ट का कहना है कि जांच एजेंसियां प्रमाणों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई अवश्य करेंगी।

श्रद्धालुओं की संख्या और आस्था में कोई कमी नहीं

ट्रस्ट ने अंत में कहा कि हाल के विवादों और दुष्प्रचार के बावजूद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई है। मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन पहले की तरह निरंतर जारी है, जो इस बात का प्रमाण है कि करोड़ों रामभक्तों का विश्वास आज भी अडिग बना हुआ है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Indo Asian Times