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H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, निशाने पर आई भारत की दिग्गज IT कंपनी

H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, निशाने पर आई भारत की दिग्गज IT कंपनी

ई दिल्ली: अमेरिका में विदेशी कामगारों के लिए जारी होने वाले H-1B और पर्म वर्क वीजा सिस्टम में चल रहे एक बहुत बड़े कथित घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. अमेरिकी श्रम विभाग ने इस बड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाते हुए एक व्यापक जांच अभियान शुरू किया है.

इस कार्रवाई की सबसे बड़ी आंच भारत केंद्रित आईटी दिग्गज कंपनी 'कॉग्निजेंट' समेत कई अन्य बड़े कॉरपोरेट घरानों पर पड़ती दिख रही है. प्रशासन का साफ कहना है कि इस धोखाधड़ी से जहां एक तरफ विदेशी कर्मचारियों का शोषण हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी नागरिकों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो गया था.

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की 'टास्क फोर्स' का कड़ा हंटर

वीजा सिस्टम में सेंध लगाने वाले इस सिंडिकेट के खिलाफ यह बड़ी स्ट्राइक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में गठित 'टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड' के तहत की गई है. इस फर्जीवाड़े की परतों को खोलने का काम श्रम विभाग की विशेष विंग 'ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल' ने किया है. OIG की शुरुआती जांच रिपोर्ट में वीजा आवेदन प्रक्रिया में कई गंभीर विसंगतियां और अवैध तौर-तरीके सामने आए हैं.

फर्जी आवेदनों की बाढ़: कई प्रमुख कम्पनी और लेबर ब्रोकर्स ने आपस में सांठगांठ करके बड़ी संख्या में जाली दस्तावेज और फर्जी आवेदन जमा कराए.

कम वेतन और शोषण: विदेशी पेशेवरों को अमेरिका बुलाकर बाजार दर से बेहद कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर किया गया और उनकी सैलरी में से अवैध रूप से पैसों की कटौती की गई.

अमेरिकी कामगारों को नुकसान: कम मजदूरी वाले विदेशी कर्मचारियों को अवैध रूप से सिस्टम में भरकर स्थानीय अमेरिकी नागरिकों का हक मारा गया, जिससे उनकी नौकरियां छिन गईं.

खुले कई राज

इस बड़ी कार्रवाई को लेकर श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथोनी डी एस्पोसिटो ने अमेरिकी मीडिया संस्थान 'फॉक्स बिजनेस' से बात करते हुए बताया कि विभाग ने इस मामले में बेहद आक्रामक रुख अपनाया है. उन्होंने स्पष्ट किया, हमने इस पूरे नेटवर्क से जुड़ी दर्जनों कंपनियों को आधिकारिक समन जारी कर दिए हैं. जांच टीम को मिले हर एक इनपुट और सुराग की गहराई से पड़ताल की जा रही है. आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी कॉग्निजेंट का विशेष रूप से नाम लेते हुए एस्पोसिटो ने कहा कि हमारे पास ऐसे पुख्ता भेदी मौजूद हैं, जो कॉग्निजेंट जैसी सबसे बड़ी कंपनियों के बारे में अहम जानकारियां और सबूत साझा कर रहे हैं. गौरतलब है कि ये कंपनियां पहले भी पर्म और H-1B वीजा नियमों को लेकर विवादों में रही हैं.

मानव तस्करी और शोषण के खिलाफ सख्त संदेश

OIG ने अपने आधिकारिक बयान में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि विदेशी गेस्ट वर्कर वीजा सिस्टम का मुख्य उद्देश्य देश में कुशल श्रमिकों की वास्तविक कमी को पूरा करना है. कुछ भ्रष्ट लोग इसका इस्तेमाल मानव तस्करी, जबरन मजदूरी और अपनी जेबें भरने के लिए कर रहे हैं. जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जांच एजेंसी ने दोहराया कि अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की कीमत पर किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं होने दिया जाएगा और इस पूरे अवैध नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा.

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