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ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी, बोले- युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं हमारे सशस्त्र बल

ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी, बोले- युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं हमारे सशस्त्र बल

रान की सशस्त्र सेनाओं ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष फिर से शुरू हो सकता है. ईरान का कहना है कि हालात ऐसे बन रहे हैं जिससे टकराव दोबारा भड़कने की संभावना है, और उसने वॉशिंगटन पर समझौतों को निभाने में कमी का आरोप लगाया है.

यह बयान ईरान के सैन्य मुख्यालय के डिप्टी मोहम्मद जाफर असादी ने दिया जिसे फार्स न्यूज एजेंसी ने जारी किया. असादी ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के हालिया बयान और कदम यह दिखाते हैं कि अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों के प्रति गंभीर नहीं है.

अमेरिका से युद्ध फिर हो सकता है

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका का रुख काफी हद तक मीडिया को ध्यान में रखकर तय किया जा रहा है, ताकि तेल की कीमतों में गिरावट को रोका जा सके और मौजूदा हालात से खुद को अलग दिखाया जा सके. असादी ने कहा कि ईरान की सेना हाई अलर्ट पर है और किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह किसी भी 'नई कार्रवाई' से बचे.

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बातचीत के नए प्रस्ताव को ठुकरा दिया. यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए भेजा गया था, जिसकी जानकारी ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने दी. ट्रंप ने कहा कि वह इस प्रस्ताव से 'संतुष्ट नहीं' हैं, हालांकि उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ा
अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान को भुगतान करती हैं, तो उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. यह चेतावनी अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने जारी की है, जिससे वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव और बढ़ गया है.

आम तौर पर दुनिया के लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है. लेकिन मौजूदा हालात में ईरान ने जहाजों पर हमले और धमकियों के चलते इस मार्ग को काफी हद तक प्रभावित किया है.

हमारी सेना पूरी तरह तैयार - ईरान
बताया जा रहा है कि ईरान कुछ जहाजों को अपनी समुद्री सीमा के करीब से सुरक्षित रास्ता दे रहा है और इसके लिए कई बार शुल्क भी वसूल रहा है।. स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर पड़ने की आशंका है.

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