नई दिल्ली: नेपाल और चीन सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड की असल वजह को लेकर अब स्थिति साफ हो रही है। पहले इसे ग्लेशियल झील के फटने या हिमस्खलन से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब चीन और नेपाल के विशेषज्ञ एकमत हैं कि ग्लेशियर टूटने से यह तबाही आई है।
चीन का बड़ा बयान - ग्लेशियर टूटना है वजह
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देशों के विशेषज्ञों ने आपदा के कारणों का शुरुआती आकलन किया है। शुरुआती जांच में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने को ही बाढ़ की मुख्य वजह माना जा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों की जांच के बाद वैज्ञानिकों का अनुमान बदल गया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भी इसी बात का जिक्र है।
ग्लेशियर टूटा, नदी रुकी, फिर दीवार टूटी और तबाही आई
वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा ल्हेंदे नदी में गिरा। इससे कुछ समय के लिए नदी का रास्ता बंद हो गया और मलबे से एक प्राकृतिक दीवार बन गई।
जब पानी का दबाव बढ़ा तो यह दीवार अचानक टूट गई और पानी बहुत तेजी से नीचे की ओर बहा। यही तेज उफान भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की ओर पहुंचा और बुधवार को रसुवा जिले में कई पुल, सड़कें और बिजली परियोजनाएं बह गईं।
चीन में 5 मौतें, 558 लापता, नेपाल में 547 से ज्यादा मौतें
इस बाढ़ में नेपाल में अब तक 547 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। वहीं चीन ने बताया कि तिब्बत में बाढ़ से 5 लोगों की मौत हुई है और 558 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। चीन के अधिकारियों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी से 1000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 555 पर्यटक थे।
चीन ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को संवेदना संदेश भेजा है। शी की अध्यक्षता में हुई कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में कहा गया कि यह इलाका बेहद ठंडा और ऊंचाई वाला है, घाटियां खड़ी हैं और मौसम तेजी से बदलता है, ऐसे में राहत अभियान चलाना काफी चुनौतीपूर्ण है।
चीन ने सभी विभागों को प्रभावी तरीके से राहत और बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं और नेपाल को आपातकालीन मदद देने की बात कही है। फिलहाल भोटेकोशी नदी के आसपास पानी का स्तर फिर बढ़ा है, इसलिए अधिकारियों ने नई चेतावनी जारी की है और लोगों को नदी के पास न जाने की सलाह दी है।

