नई दिल्ली: पाकिस्तान की लंबे समय से चल रही कूटनीतिक कोशिशों को उस समय झटका लगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जुड़ी संभावित बातचीत में जिन देशों की भूमिका का जिक्र किया, उनमें पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं था.
ट्रंप ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर का उल्लेख किया, लेकिन पाकिस्तान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया. इससे यह संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका फिलहाल पाकिस्तान को इस प्रक्रिया में अहम भागीदार के रूप में नहीं देख रहा है.
व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के अनुरोध पर बातचीत शुरू हो रही है. उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में सऊदी अरब, यूएई और कतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि, पाकिस्तान का नाम न लिए जाने से यह चर्चा तेज हो गई कि अमेरिका ने उसे मध्यस्थ देशों की सूची से अलग रखा है. पिछले कुछ समय से पाकिस्तान खुद को इस विवाद में मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश करता रहा था.
पाकिस्तान पर क्यों नहीं जताया गया भरोसा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान, दोनों ही पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं रहे हैं. अमेरिका में कई नेताओं ने पहले भी पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. वहीं, ईरान भी पाकिस्तान के अमेरिका के साथ करीबी संबंधों को लेकर सतर्क रहा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बन गई. पूर्व अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी पहले पाकिस्तान को लेकर गंभीर टिप्पणियां की थीं. उन्होंने दावा किया था कि ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तान के एयरबेस में जगह मिली हुई है. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर खड़े किए.
चीन-ईरान से जुड़ी रिपोर्टों ने बढ़ाई चर्चा
हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि पाकिस्तान, चीन और ईरान के बीच रक्षा सहयोग में एक अहम कड़ी की भूमिका निभा रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, चीन से ईरान भेजे जाने वाले कुछ रक्षा उपकरण पाकिस्तान के रास्ते पहुंचाए जा सकते हैं. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद, ऐसी खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
ईरान को ट्रंप की सख्त चेतावनी
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते पर एक बार फिर कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि तेहरान के पास समझौते के लिए यह अंतिम अवसर हो सकता है. ट्रंप के अनुसार, यदि ईरान सकारात्मक रुख नहीं अपनाता, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी ओर, ईरान पहले ही अमेरिका के साथ किसी नई वार्ता से इनकार कर चुका है. ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी रहेगी.

