नई दिल्ली: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने गुरुवार को इस्लामाबाद में हुए पाकिस्तान आर्थिक शिखर सम्मेलन 2026 में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश का 70-80 साल पुराना शासन सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और अगर अब सुधार नहीं हुए तो देश बार-बार संकट में फंसता रहेगा।
"सिस्टम लोगों को न्याय और रोजगार देने में नाकाम"
नकवी ने साफ कहा, "चाहे आप सहमत हों या नहीं, हम जिस व्यवस्था में जी रहे हैं वो फेल हो चुकी है।" उनके मुताबिक दशकों से चला आ रहा गवर्नेंस मॉडल लोगों को न्याय, नौकरी और बुनियादी सुविधाएं देने में नाकाम रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी सिस्टम के अंदर रहकर समस्या सुलझाने की कोशिशें बार-बार नाकाम हुई हैं। "अगर 70-80 साल में कोई सिस्टम ठीक से नहीं चला तो इसका मतलब उसकी नींव में ही खामी है।"
नए प्रांत बनाने की वकालत
समाधान के तौर पर गृह मंत्री ने सत्ता के विकेंद्रीकरण की बात की। उन्होंने मांग की कि पाकिस्तान में नई प्रशासनिक इकाइयां और नए प्रांत बनाए जाएं। नकवी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे एक कमरे में बैठें - चाहे एक दिन, एक महीने या एक साल के लिए। "सभी को मिलकर देश के हर मुद्दे पर बात करनी होगी, जिसमें नई इकाइयों का गठन भी शामिल है। वरना हम इसी तरह संकटों में फंसते रहेंगे।"
"हम सिर्फ फायरफाइटिंग कर रहे हैं"
खुद को लोकतंत्र का समर्थक बताते हुए नकवी ने सरकार के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पीएम शहबाज शरीफ 12-14 घंटे मेहनत करते हैं, लेकिन हम सिर्फ फायरफाइटिंग कर रहे हैं। जब तक बुनियादी चीजें ठीक नहीं होंगी, हालात नहीं सुधरेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान कृषि प्रधान देश है, फिर भी गेहूं जैसी फसलें बाहर से मंगानी पड़ रही हैं।
युवाओं का गुस्सा और 'कॉकरोच' वाली चेतावनी
युवाओं पर बोलते हुए नकवी ने कहा कि Gen-Z को वजीफा या टैबलेट नहीं चाहिए। उन्हें मेरिट के आधार पर नौकरी और बराबर के मौके चाहिए। "हमें लगता है कुछ हजार रुपये दे देंगे तो युवा खुश हो जाएंगे, लेकिन उनसे पूछिए वो क्या चाहते हैं। सही मौका मिले तो पाकिस्तानी युवा हर महीने 2000 से 4000 डॉलर कमा सकते हैं।"
यहीं उन्होंने सबसे बड़ी चेतावनी दी। भारत में हालिया छात्र प्रदर्शनों में Gen-Z के लिए इस्तेमाल हुए शब्द का जिक्र करते हुए कहा, "अगर ये कॉकरोच एकजुट हो गए तो ये सब कुछ तहस-नहस कर सकते हैं। सरकार को युवाओं का गुस्सा बढ़ने से पहले उनकी मांगें माननी होंगी।"
कर्ज और कारोबारियों पर भी दिया बयान
देश की अर्थव्यवस्था पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि संघीय सरकार का बजट ही निगेटिव से शुरू होता है। हम हर साल चर्चा करते हैं कि कितना और कर्ज लेना है। साथ ही उन्होंने व्यापारियों से राजनीति में आने की अपील की। उन्होंने कहा, "आप नेताओं को फंड देते हैं, खुद चुनाव लड़ने को शर्म मानते हैं। देश सुधारना है तो खुद आगे आना होगा।"

