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राम मंदिर दान चोरी मामला: SIT की शुरुआती रिपोर्ट में बड़े खुलासे, 40 दिनों में 70 बार चोरी के मिले सबूत

राम मंदिर दान चोरी मामला: SIT की शुरुआती रिपोर्ट में बड़े खुलासे, 40 दिनों में 70 बार चोरी के मिले सबूत

अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में दान की रकम में कथित चोरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के दान की गिनती के दौरान लंबे समय से अनियमितताएं हो रही थीं और सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियां साफ दिखाई दी हैं. शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि चोरी की घटनाएं केवल हाल के दिनों तक सीमित नहीं थीं, बल्कि पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही होंगी. अब इस पूरे मामले की गहन जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच दान की गिनती वाले कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई. इसमें करीब 40 दिनों के भीतर लगभग 70 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें कुछ कर्मचारी नकदी को छिपाकर ले जाते दिखाई दिए. जांच में यह भी पाया गया कि कुछ लोग पैसे अपनी जेबों और जुराबों में रखकर बाहर ले जा रहे थे. रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इस अवधि से पहले भी इसी तरह की घटनाएं हो सकती हैं, जिनकी अलग से जांच की जा रही है.

कई लोगों पर कार्रवाई की सिफारिश

जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. अब तक आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है. वहीं, एसआईटी ने छह प्रमुख लोगों के खिलाफ चोरी, गबन और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्र के नाम शामिल हैं. इसके अलावा गिनती कक्ष के प्रभारी और कुछ अन्य निगरानी अधिकारियों की भूमिका की भी अलग से जांच करने की सलाह दी गई है.

सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई बड़ी लापरवाहियां

एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि दान की गिनती के दौरान तय की गई मानक कार्यप्रणाली (SOP) का ठीक से पालन नहीं किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, गिनती कक्ष में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जाती थी. कर्मचारियों को जेब वाले कपड़े पहनने की अनुमति थी और वे अपने निजी सामान भी अंदर ले जा रहे थे. इसके अलावा अलग-अलग दानपात्रों की नकदी को एक साथ मिलाकर गिना जाता था, जिससे निगरानी और पारदर्शिता प्रभावित हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी प्रभावी नहीं थी, जिसके कारण चोरी की घटनाएं लंबे समय तक पकड़ में नहीं आ सकीं.

एसआईटी बनने से पहले ही लाखों रुपये बरामद

रिपोर्ट में बताया गया है कि एसआईटी के गठन से पहले ही राम मंदिर ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए गिनती प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों के पास से करीब 78.94 लाख रुपये, विदेशी मुद्रा, आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किया था. इसके अलावा 4 जून को गिनती कक्ष के पास स्थित शौचालय से भी करीब 2.25 लाख रुपये नकद मिलने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है. जांच के दौरान कुछ आरोपितों के बैंक खातों में उनकी आय से कहीं अधिक रकम जमा होने और बड़े लेनदेन के संकेत भी मिले हैं, जिनकी वित्तीय जांच जारी है.

चांदी की ईंटों और कीमती चढ़ावे की भी जांच जारी

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के गायब होने संबंधी दावों की भी जांच की जा रही है. फिलहाल इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है. जांच एजेंसी का कहना है कि कई पहलुओं पर अभी भी जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी. सरकार ने एसआईटी को विस्तृत जांच पूरी करने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया है. इसके बाद अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी.

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