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सिल्क साड़ी और मंदिरों वाला 'कांचीपुरम' देश का नंबर 1 बना 'अफेयर शहर', दिल्ली-मुंबई को भी पीछे छोड़ा

सिल्क साड़ी और मंदिरों वाला 'कांचीपुरम' देश का नंबर 1 बना 'अफेयर शहर', दिल्ली-मुंबई को भी पीछे छोड़ा

ई दिल्ली: भारत को हमेशा से परिवार और पारंपरिक रिश्तों का देश माना जाता है. शादी को पवित्र बंधन समझा जाता है, लेकिन बदलते समय में रिश्तों का रूप धीरे-धीरे बदल रहा है. विवाहित लोग अब भावनात्मक समर्थन या रिश्तों में कमी महसूस होने पर डिस्क्रीट डेटिंग ऐप्स की ओर रुख कर रहे हैं.

कांचीपुरम बना 'अफेयर कैपिटल'

तमिलनाडु का कांचीपुरम, जो मंदिरों और रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, अब विवाहेतर संबंधों के मामले में देश का सबसे आगे शहर बन गया है. वैश्विक एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग प्लेटफॉर्म Ashley Madison के जून 2025 के आंकड़ों के अनुसार, कांचीपुरम ने देशभर में टॉप स्थान हासिल कर लिया है. पिछले साल यह 17वें स्थान पर था, लेकिन एक साल में इसने बड़े शहरों जैसे दिल्ली और मुंबई को भी पीछे छोड़ दिया.

Gleeden ऐप के आंकड़े क्या कहते हैं?

एक और लोकप्रिय ऐप Gleeden के अनुसार, भारत में इसके यूजर्स की संख्या अब 40 लाख (4 मिलियन) से ज्यादा हो चुकी है. बेंगलुरु इस लिस्ट में सबसे ऊपर है, जहां से कुल यूजर्स का 18 प्रतिशत हिस्सा आता है. उसके बाद हैदराबाद (17%), दिल्ली (11%), मुंबई (9%) और पुणे (7%) का स्थान है. आईटी हब वाले शहरों में व्यस्त जीवनशैली, काम का दबाव और अकेलेपन की वजह से यह ट्रेंड ज्यादा दिख रहा है.

ऐप पर 65 प्रतिशत यूजर्स पुरुष हैं जबकि 35 प्रतिशत महिलाएं. पिछले दो सालों में महिलाओं के रजिस्ट्रेशन में 148 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है. ज्यादातर यूजर्स 25 से 50 साल की उम्र के बीच के हैं. Gleeden के 2024 सर्वे में 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने स्विंगिंग और ओपन रिलेशनशिप जैसी गैर-पारंपरिक रिश्तों में रुचि दिखाई.

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे रिश्ते?

व्यस्त दिनचर्या में कई लोग भावनात्मक अकेलेपन को मुख्य वजह बताते हैं. ऐप पर सबसे ज्यादा एक्टिविटी लंच ब्रेक (दोपहर 12 से 3 बजे) और रात 10 बजे के बाद देखी जाती है. कई मामलों में पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे की गतिविधियों का पता होता है, लेकिन वे चुप रहना पसंद करते हैं. खुले विवाह की अवधारणा भी तेजी से बढ़ रही है.

कांचीपुरम जैसे छोटे शहर में इस तरह की गतिविधि का बढ़ना कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है. यह दिखाता है कि बड़े शहरों के साथ-साथ टियर-2 शहरों में भी रिश्तों को लेकर सोच बदल रही है. हालांकि, यह आंकड़े सिर्फ ऐप यूज पर आधारित हैं और समाज के पूरे चित्र को नहीं दर्शाते. बदलते भारत में रिश्तों की ये नई प्रवृत्ति व्यक्तिगत खुशी और आजादी की तलाश को भी उजागर करती है, लेकिन साथ ही पारंपरिक मूल्यों पर सवाल भी खड़े करती है.

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