रिपोर्ट : विजय तिवारी
मुंबई, 8 जुलाई।
मुंबई के मालाड पश्चिम स्थित रिजॉइस इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित एक प्रार्थना सभा को लेकर उठे विवाद ने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले लिया है।
महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि मामले की जांच के बाद पुलिस ने चमत्कारी इलाज के दावों, अंधविश्वास फैलाने और कथित आपत्तिजनक धार्मिक गतिविधियों के संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया कि अब तक की जांच में जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
यह मामला उस समय राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया, जब भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने विधानसभा के प्रश्नकाल में इसे प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 मई 2026 को स्कूल परिसर में आयोजित एक प्रार्थना सभा के दौरान मौजूद वक्ता ने लोगों के सिर पर हाथ रखकर बीमारियां ठीक करने, जीवन की परेशानियां दूर करने और चमत्कारी शक्तियों के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने जैसे दावे किए। उनके अनुसार कार्यक्रम में कथित रूप से हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की गईं तथा लोगों को ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया। विधायक ने यह भी दावा किया कि इस प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम विद्यालय परिसर में नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहे हैं।
इन आरोपों के बाद शिकायत मिलने पर मालाड पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। विधानसभा में सरकार की ओर से जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने बताया कि पुलिस ने शिकायतकर्ता के बयान, उपलब्ध वीडियो फुटेज, कार्यक्रम से जुड़े अन्य दस्तावेजों तथा संबंधित व्यक्तियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर विस्तृत जांच की। जांच के दौरान ऐसा कोई प्रत्यक्ष या ठोस प्रमाण सामने नहीं आया जिससे यह सिद्ध हो सके कि किसी व्यक्ति पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला गया, प्रलोभन दिया गया या जबरन धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया गया हो। इस कारण फिलहाल धर्मांतरण से जुड़े आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
हालांकि जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिन्हें प्रथम दृष्टया कानून के उल्लंघन की श्रेणी में माना गया। गृह राज्य मंत्री ने विधानसभा को बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार उसे अपने घर में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें न रखने की सलाह दी गई थी। इसके अलावा कार्यक्रम में बीमारियों के चमत्कारी उपचार, प्रार्थना के माध्यम से रोगों के तत्काल निवारण, कष्टों से मुक्ति और अलौकिक शक्तियों से जीवन की समस्याओं के समाधान जैसे दावे किए गए। जांच एजेंसियों ने इन गतिविधियों को प्रथम दृष्टया अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला आचरण माना।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर मालाड पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के साथ-साथ महाराष्ट्र मानव बलि एवं अन्य अमानवीय, अनिष्ट, अघोरी प्रथा और काला जादू निवारण एवं उन्मूलन अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। यह अधिनियम राज्य में अंधविश्वास, चमत्कारी उपचार के भ्रामक दावों, काला जादू तथा लोगों की आस्था का दुरुपयोग कर उन्हें भ्रमित करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
पुलिस अब मामले के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है। जांच के दायरे में कार्यक्रम के आयोजक, वक्ता, स्कूल प्रबंधन, प्रत्यक्षदर्शी, शिकायतकर्ता तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान शामिल हैं। इसके अलावा कार्यक्रम के वीडियो फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान नए तथ्य या अतिरिक्त साक्ष्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
विधानसभा में सरकार का जवाब सामने आने के बाद भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर विधानसभा की कार्यवाही का वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा कि उनके द्वारा उठाए गए प्रश्न के बाद रिजॉइस इंटरनेशनल स्कूल के विरुद्ध एंटी-सुपरस्टिशन एंड ब्लैक मैजिक एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि प्रार्थना सभा के दौरान हिंदू परिवारों को देवी-देवताओं की तस्वीरें हटाने की सलाह दी जा रही थी और इसी विषय पर उन्होंने सरकार से कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा था।
मामले के विधानसभा में उठने के बाद राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों, अंधविश्वास विरोधी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन तथा धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक दायित्वों के बीच संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों और साक्ष्यों का पूरी गंभीरता से परीक्षण किया जाना चाहिए। वहीं कुछ संगठनों ने विद्यालय परिसरों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की आवश्यकता भी जताई है।
गृह राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने विधानसभा को आश्वस्त किया कि सरकार इस पूरे मामले में किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह या राजनीतिक दबाव के बिना केवल कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति, संस्था या संगठन कानून का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं होंगे, उन्हें भी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा।
फिलहाल यह मामला जांचाधीन है और पुलिस की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दर्ज प्राथमिकी में शामिल आरोपों में किन बिंदुओं पर अभियोजन आगे बढ़ेगा, किन तथ्यों की पुष्टि हुई है और किन आरोपों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में स्वीकार नहीं किया जा सका। सरकार ने दोहराया है कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।

