Dailyhunt
मुरादाबाद: रसूख के आगे कानून बौना? नाबालिगों की पिटाई का वीडियो वायरल, फिर भी पीड़ितों पर ही 307 का मुकदमा

मुरादाबाद: रसूख के आगे कानून बौना? नाबालिगों की पिटाई का वीडियो वायरल, फिर भी पीड़ितों पर ही 307 का मुकदमा

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ सत्ता और राजनीतिक रसूख के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मामला असालतपुरा इलाके के 'बकरी के हाते' का है, जहाँ सपा विधायक नासिर कुरैशी के साले और उनके बेटों पर गरीब नाबालिग बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगा है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, नासिर कुरैशी के साले और उनके कुछ साथी असालतपुरा स्थित 'बड़े हाते' पर पहुंचे और वहाँ खेल रहे कुछ नाबालिग और गरीब बच्चों के साथ बुरी तरह मारपीट की। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि दबंगई के साथ बच्चों को पीटा जा रहा है।

पीड़ितों पर ही दर्ज हुई हत्या के प्रयास की धारा

हैरानी की बात यह है कि इस पूरी घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों पर कार्रवाई करने के बजाय, कथित तौर पर विधायक के दबाव में आकर उन नाबालिग बच्चों और उनके परिवारों पर ही धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विधायक ने अपने साले के बच्चों को बचाने के लिए पुलिस पर प्रभाव डाला और झूठा मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार करवाकर निर्दोष बच्चों को फंसा दिया।

गरीब परिवारों में दहशत का माहौल

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब राजनीतिक रसूख का ऐसा इस्तेमाल हुआ है। आरोप है कि इससे पहले भी कई गरीब परिवारों को इसी तरह धारा 307 के झूठे मुकदमों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा चुका है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि:

"जब मारपीट का वीडियो सबके सामने है, तो पुलिस ने किस आधार पर हम पर ही जानलेवा हमले का केस दर्ज कर दिया? क्या गरीबों के लिए न्याय का कोई दरवाजा नहीं बचा है?"

निष्पक्ष जांच की मांग

वर्तमान में पीड़ित परिवार और स्थानीय समाज सेवी संगठन पुलिस प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि:

वायरल वीडियो के आधार पर असली दोषियों को चिन्हित कर जेल भेजा जाए।

नाबालिग बच्चों पर लगाए गए फर्जी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।

दोषी पुलिस कर्मियों और झूठा मेडिकल देने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

यह घटना अब मुरादाबाद के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों के बीच क्या इन गरीब मासूम बच्चों को इंसाफ मिल पाता है या रसूख की चमक सच्चाई पर भारी पड़ेगी।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Janta Ki Awaaz