बहराइच के डॉक्टर ने कर दिखाया कमाल, अमेरिका तक हुआ बीमारी पर शोध
दिल्ली-मुंबई से मंगाकर लगाए गए प्रोटीन और एल्वोमिन इंजेक्शन
अनुराग गुप्ता
बहराइच। पुरानी कहावत है कि डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं, इस बात को सच कर दिखाया है बहराइच के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शिशिर अग्रवाल ने।
एक ऐसी दुर्लभ बीमारी, जहां बचने की उम्मीद न के बराबर होती है, वहां 10 साल की कड़ी मेहनत और डॉक्टरों के जज्बे ने एक मासूम को नया जीवन दिया है। जन्म के समय जो बच्चा प्लास्टिक जैसी झिल्ली में लिपटा हुआ था, आज वह आम बच्चों की तरह हंस रहा है, रो रहा है और बातें कर रहा है।
श्रावस्ती जिले के भिनगा अंतर्गत चौबेपुरवा भेला गांव की रहने वाली तरन्नुम ने अक्टूबर 2016 में अजीबोगरीब बच्चे को जन्म दिया।
बच्चा पूरी तरह से एक 'प्लास्टिक झिल्ली' से लिपटा हुआ था। न वह रो सकता था, न हंस सकता था और न ही कोई हरकत कर रहा था। स्थानीय चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए, लेकिन तरन्नुम जब बच्चे को लेकर बहराइच के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ शिशिर अग्रवाल के पास पहुँची तो उम्मीद की किरण जग गयी।
डॉक्टर शिशिर ने इस बेहद चुनौतीपूर्ण केस को अपने हाथ में लिया। नवजात को नौ दिनों तक आईसीयू में रखा। बीमारी इतनी गंभीर थी कि इस पर अमेरिका के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पंकज अग्रवाल से सलाह ली गई। इतना ही नहीं अमेरिका में इस बीमारी पर रिसर्च भी किया गया। लगभग एक दशक चले लम्बे उपचार के दौरान दिल्ली और मुंबई से विशेष प्रोटीन और एल्वोमिन इंजेक्शन मंगाकर बच्चे को लगाए गए,साथ ही लगातार फिजियोथेरेपी की गई।
डॉक्टर शिशिर अग्रवाल की माने तो इस तरह के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। मेडिकल साइंस में एक लाख ऐसे बच्चों में बमुश्किल किसी एक को ही बचा पाना संभव हो पाता है। 10 साल के निरंतर इलाज और कड़ी मेहनत का परिणाम है कि आज बच्चा 80 फीसदी तक पूरी तरह ठीक हो चुका है और आम बच्चों की तरह व्यवहार कर रहा है।
10 साल का लंबा सफर, परिवार का अटूट विश्वास और डॉक्टर की कभी न हार मानने वाली जिद... आज रंग लाई है। 'प्लास्टिक बेबी' के नाम से जाना जाने वाला यह बच्चा आज अपने परिवार के बीच चहक रहा है।

