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भारत की युवा शक्ति और रिश्तों को लेकर भागवत की सोच की तारीफ

भारत की युवा शक्ति और रिश्तों को लेकर भागवत की सोच की तारीफ

मेरिका : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख **मोहन भागवत** के अमेरिका दौरे के दौरान भारतीय-अमेरिकी निवेशकों और उद्योग जगत की हस्तियों से उनकी मुलाकात चर्चा में है। न्यूयॉर्क में हुई एक बैठक के बाद अमेरिकी निवेशक **आशा जडेजा मोटवानी** ने कहा कि मोहन भागवत भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के समर्थक हैं और उन्हें भारतीय युवाओं की क्षमता पर पूरा भरोसा है।

मोहन भागवत अपने तीन दिवसीय अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क पहुंचे, जहां उन्होंने उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के साथ संवाद किया। इस बैठक में तकनीक, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर हुई चर्चा

बैठक के बाद अमेरिकी निवेशक आशा जडेजा मोटवानी ने कहा कि मोहन भागवत भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रिश्तों के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि भागवत भारत के युवाओं की क्षमता और देश की विकास यात्रा को लेकर सकारात्मक सोच रखते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में भारत की आर्थिक संभावनाओं, तकनीकी क्षेत्र में अवसरों और वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा की भूमिका को लेकर बातचीत हुई।

निवेशकों से संवाद पर जोर

मोहन भागवत की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को लगातार बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। भारतीय मूल के कई उद्योगपति और निवेशक अमेरिका में भारत की आर्थिक प्रगति को करीब से देखते हैं।

बैठक में शामिल लोगों ने भारत में निवेश के अवसरों और युवाओं की भूमिका पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी भारतीय समुदाय भारत-अमेरिका संबंधों में अहम कड़ी की भूमिका निभाता है।

अमेरिका दौरे का उद्देश्य

RSS प्रमुख का यह दौरा संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। इस दौरान वे भारतीय मूल के लोगों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से संवाद कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करने वाले हैं। इस कार्यक्रम को भारतीय संस्कृति, एकता और सामाजिक जुड़ाव के संदेश से जोड़ा जा रहा है।

भारत की छवि और वैश्विक भूमिका पर बात

बैठकों के दौरान भारत की वैश्विक भूमिका, आर्थिक विकास और युवाओं की क्षमता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। मोहन भागवत ने पहले भी कई मंचों से कहा है कि भारत को अपनी संस्कृति और मूल्यों के साथ आगे बढ़ते हुए विश्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

निवेशकों के साथ संवाद का उद्देश्य भारत की विकास संभावनाओं और वैश्विक साझेदारी को लेकर चर्चा करना भी माना जा रहा है।

दौरे को लेकर विवाद भी

मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर कुछ संगठनों और नेताओं ने आलोचना भी की है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं, जबकि RSS इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

वहीं, कई भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने भागवत के दौरे को भारतीय समुदाय से जुड़ाव और संवाद के अवसर के रूप में देखा है।

भारत-अमेरिका संबंधों में प्रवासी भारतीयों की भूमिका

भारत और अमेरिका के रिश्तों में प्रवासी भारतीय समुदाय का योगदान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका में बसे भारतीय मूल के लोग व्यापार, तकनीक, शिक्षा और राजनीति समेत कई क्षेत्रों में प्रभाव रखते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संवाद दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

मोहन भागवत और अमेरिकी निवेशकों की बैठक के बाद भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश देने की कोशिश दिखाई दी है। जहां एक ओर निवेश और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर यह दौरा वैश्विक स्तर पर भारतीय समुदाय से जुड़ाव का माध्यम भी बना।

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