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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिग्नलिंग और संरक्षा में हासिल की बड़ी सफलता

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिग्नलिंग और संरक्षा में हासिल की बड़ी सफलता

Raipur. रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग वित्तीय वर्ष 2025-26 में संरक्षा, क्षमता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

विभाग ने आधुनिक सिग्नलिंग तकनीकों जैसे इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई), पैनल इंटरलॉकिंग और ऑटोमेटिक सिग्नलिंग का व्यापक विस्तार कर रेल परिचालन को और अधिक सुरक्षित, तीव्र एवं समयबद्ध बनाया है।

वर्ष 2025-26 में 11 स्टेशनों पर नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की गई, जिससे जटिल यार्ड संरचनाओं में भी सुरक्षित और निर्बाध ट्रेन संचालन सुनिश्चित हुआ। इनमें प्रमुख स्टेशन गोंदिया (506 रूट), उरगा (46 रूट), किरोड़ीमल नगर (223 रूट), कोथारी रोड (41 रूट), रायगढ़ (286 रूट), सारागांव देवरी (117 रूट), चक्रधर नगर (174 रूट), कुरुद (32 रूट), बाराद्वार (198 रूट), पेंड्रा रोड (226 रूट) और बालपुर रोड (26 रूट) शामिल हैं।

इसी तरह, 25 स्टेशनों में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में संशोधन किया गया, जिससे सिग्नलिंग सिस्टम की विश्वसनीयता और ट्रेन संचालन की सुरक्षा बढ़ी। 9 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग में संशोधन कर इसे अधिक संरक्षित और कुशल बनाया गया।

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का विस्तार कुल 186 किलोमीटर में किया गया। प्रमुख सेक्शन हैं - दगोरी-निपनिया (18 कि.मी.), गुदमा-गंगाझरी (26 कि.मी.), उरकुरा-सरोना (11 कि.मी.), कोतरलिया-जामगा (27 कि.मी.), चांपा-सारागांव (20 कि.मी.), रायगढ़-चक्रधर नगर-कोतरलिया (30 कि.मी.), निपनिया-भाटापारा (30 कि.मी.), रायगढ़-जेएसपीएल-किरोड़ीमल नगर (24 रूट किमी)।

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग के लागू होने से अब एक ही सेक्शन में एक से अधिक ट्रेनें सुरक्षित रूप से संचालित की जा रही हैं। प्रत्येक ब्लॉक सेक्शन को छोटे-छोटे खंडों में विभाजित कर सिग्नलिंग व्यवस्था को सटीक बनाया गया है। इसके फायदे हैं:

ट्रेनों के बीच सुरक्षित अंतराल सुनिश्चित होना

सिग्नल फेल होने पर स्वतः सुरक्षा

मानवीय त्रुटियों की संभावना में कमी

सिस्टम विफलता में उल्लेखनीय कमी

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और ऑटोमेटिक सिग्नलिंग के विस्तार से ट्रेन संचालन की क्षमता और समयबद्धता में भी सुधार हुआ। अब कम समय अंतराल में अधिक ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिससे लाइन क्षमता बढ़ी और समयबद्धता बेहतर हुई। यह सभी उपलब्धियाँ महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता और सतत प्रोत्साहन का परिणाम हैं। उनके मार्गदर्शन में सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए संरक्षा मानकों को नई ऊँचाई दी और परिचालन क्षमता में सुधार सुनिश्चित किया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग भविष्य में भी उन्नत तकनीकों के माध्यम से संरक्षा, क्षमता और विश्वसनीयता के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रयासरत रहेगा।

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