Prayagraj : मेरठ ज़ोन में सक्रिय एक कथित 'हनी-ट्रैप' गैंग से जुड़े मामले मेंइलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख़्त रुख़ अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस को मामले की गहन जांच करने और कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया है।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीज़न बेंच ने मेरठ ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को पूरे मामले की जांच करवाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे गैंग्स का अस्तित्व—जो कथित तौर पर महिलाओं के ज़रिए लोगों को फंसाते हैं और उन्हें ब्लैकमेल करते हैं—समाज में एक "गंभीर और चिंताजनक स्थिति" को दर्शाता है। बेंच ने कहा कि अगर ऐसे अपराधों को बिना किसी सख़्त कार्रवाई के जारी रहने दिया गया, तो किसी भी शरीफ़ इंसान के लिए समाज में रहना मुश्किल हो जाएगा।
कोर्ट एक महिला और चार अन्य आरोपियों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अपने ख़िलाफ़ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की थी। आरोप ये हैं कि पहली याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया और उसे बिजनौर के एक होटल में बुलाया, जहाँ उनके बीच शारीरिक संबंध बने। कथित तौर पर इस घटना को गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड कर लिया गया, जिसके बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और 10 लाख रुपये की मांग की। आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में शिकायतकर्ता को किसी दूसरी जगह बुलाया गया, जहाँ मुख्य आरोपी के साथ-साथ दो पुलिसकर्मी भी मौजूद थे (जो इस मामले में आरोपी हैं)। इन लोगों ने शिकायतकर्ता को वीडियो दिखाकर पैसों की मांग की। हालाँकि, शिकायतकर्ता ने पैसे देने से इनकार कर दिया और पुलिस को इस मामले की सूचना दी, जिसके बाद यह मामला सामने आया।

